SGBs में 250% का शानदार रिटर्न, पर टैक्स नियमों ने बदला खेल
भारत के Sovereign Gold Bonds (SGBs) 2020-21 Series II के निवेशकों की बल्ले-बल्ले हो गई है, क्योंकि इन बॉन्ड्स ने उन्हें करीब 250.3% का जबरदस्त रिटर्न दिलाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इन बॉन्ड्स के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन (समय से पहले भुगतान) के लिए प्रति ग्राम ₹15,904 का भाव तय किया है। यह रकम उन निवेशकों के लिए है जिन्होंने ऑनलाइन सबस्क्रिप्शन के समय प्रति ग्राम ₹4,540 में बॉन्ड खरीदे थे। यह शानदार उछाल इस बात का प्रमाण है कि सोना आज भी महंगाई से बचाव (inflation hedge) का एक मजबूत जरिया है। मई 2026 के मध्य तक, 24-कैरेट सोने की मौजूदा बाजार दरें ₹15,600 से ₹15,950 प्रति ग्राम के बीच चल रही थीं, और SGBs का रिडेम्पशन वैल्यू सोने की मौजूदा कीमतों से मेल खाता है, जो कि तीन दिनों के औसत पर आधारित है।
सोने की रफ्तार: एक भरोसेमंद सुरक्षित निवेश
सोने की यह हालिया तेजी इस बात को साबित करती है कि यह आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के समय में एक भरोसेमंद 'सेफ-हेवन एसेट' बना हुआ है। पिछले पांच सालों में सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। यह ट्रेंड गोल्ड के विभिन्न निवेश माध्यमों में भी दिख रहा है; उदाहरण के लिए, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने दमदार रिटर्न दिया है। एक अनुमान के मुताबिक, ₹10,000 की मासिक एसआईपी (SIP) पांच साल में बढ़कर लगभग 10 लाख रुपये हो गई, और इस दौरान सालाना रिटर्न 20% से ऊपर रहा। SGBs पर 2.5% का फिक्स्ड सालाना इंटरेस्ट भी मिलता है, जिसका भुगतान हर छह महीने में होता है। हालांकि, इस ब्याज से होने वाली आय को निवेशक के इनकम टैक्स ब्रैकेट के अनुसार 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) के तहत टैक्सेबल माना जाता है।
बजट 2026 के टैक्स नियमों का बड़ा असर
Sovereign Gold Bonds की आकर्षण क्षमता में सबसे बड़ा बदलाव बजट 2026 के बाद लागू हुए टैक्स रिफॉर्म्स के कारण आया है। पहले, यदि बॉन्ड को पूरी आठ साल की मैच्योरिटी तक रखा जाता था, तो SGBs पर होने वाले कैपिटल गेन्स पर टैक्स छूट मिलती थी। लेकिन अब, यह छूट केवल उन निवेशकों के लिए है जो ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स हैं और बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखते हैं। जो निवेशक सेकेंडरी मार्केट से SGBs खरीदते हैं या पांच साल की अवधि के भीतर प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का विकल्प चुनते हैं, उन्हें अब कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। यह टैक्स व्यवस्था उन निवेशकों के लिए नेट रिटर्न को काफी कम कर देती है जिन्हें पैसों की तत्काल जरूरत होती है या जो एक्सचेंज के जरिए बॉन्ड बेचते हैं। मैच्योरिटी से पहले बेचने वालों के लिए, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (12 महीने से अधिक समय तक रखे गए) पर 12.5% की दर से टैक्स लगेगा, जबकि शॉर्ट-टर्म गेन्स पर व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्लैब रेट लागू होगा।
सोने की मांग मजबूत, पर SGBs पर टैक्स का असर जारी
भविष्य में सोने को पोर्टफोलियो में एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक तनातनी, महंगाई की चिंताएं और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने की सेफ-हेवन अपील को बनाए हुए हैं। सोने में निवेश की मांग, जिसमें फिजिकल गोल्ड, ETFs और SGBs शामिल हैं, मार्च तिमाही 2026 में भारत में ज्वेलरी की मांग से काफी आगे निकल गई थी। हालांकि टैक्स नियमों में बदलाव ने उन निवेशकों के लिए SGBs की लोकप्रियता थोड़ी कम कर दी है जिन्हें जल्दी लिक्विडिटी (तरलता) की जरूरत है, लेकिन कुल मिलाकर सोना डाइवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) और वेल्थ प्रिजर्वेशन (संपत्ति के संरक्षण) के लिए एक महत्वपूर्ण एसेट क्लास बना रहेगा। RBI द्वारा SGB स्कीम का प्रबंधन और बढ़ते रिडेम्पशन पेआउट्स से जुड़ी लागतें भविष्य में स्कीम में कुछ और नीतिगत बदलावों की ओर इशारा कर सकती हैं।