RBI का ऐलान और जल्दी रिडेम्पशन की तारीखें
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2026 में मैच्योर होने वाली सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की चुनिंदा किश्तों के लिए समय से पहले पैसे निकालने (premature redemption) की तारीखें जारी कर दी हैं। ये वे बॉन्ड्स हैं जो अक्टूबर 2018 से अक्टूबर 2020 के बीच जारी किए गए थे और अब अप्रैल 2026 में अपना 5 साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड पूरा कर रहे हैं। इसमें 2018-19 सीरीज II, 2019-20 सीरीज V & VI, और 2020-21 सीरीज I & VII शामिल हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे अपनी किश्त के अनुसार तय समय-सीमा के अंदर रिडेम्पशन के लिए रिक्वेस्ट दें।
टैक्स का बड़ा झटका: 5 साल बाद भी लगेगा कैपिटल गेन टैक्स
हालांकि, इस घोषणा का असर सीमित हो गया है क्योंकि 1 अप्रैल, 2026 से टैक्स नियमों में एक बड़ा बदलाव लागू हो रहा है। 2026 के बजट प्रस्तावों के अनुसार, SGB को 5 साल की अवधि के बाद जल्दी रिडीम करने पर मिलने वाली कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) की छूट अब खत्म कर दी जाएगी। यह बदलाव निवेशकों के लिए एसजीबी से जल्दी एग्जिट करने के आकर्षण को काफी कम कर देता है, क्योंकि अब उन्हें समय से पहले भुनाने पर कैपिटल गेन टैक्स भरना पड़ सकता है।
सोने में निवेश के अन्य साधनों से तुलना
यह टैक्स परिवर्तन SGB को सोने में निवेश के अन्य माध्यमों से अलग करता है। जहां फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) बेचने या गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से बाहर निकलने पर होल्डिंग पीरियड के बावजूद कैपिटल गेन टैक्स लगता है, वहीं SGB का 5 साल बाद टैक्स-फ्री एग्जिट एक बड़ा फायदा था। नए नियमों के बाद, जल्दी रिडेम्पशन का यह खास फायदा अब नहीं रहेगा, जिससे यह सोने में निवेश के अन्य विकल्पों के करीब आ जाएगा। हालांकि, SGB पर मिलने वाला 2.5% का सालाना ब्याज (Interest) और सोने की कीमत में बढ़ोतरी का लाभ अभी भी बना रहेगा, जो फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ से अलग है (जिनमें अक्सर एक्सपेंस रेशियो - Expense Ratio - होता है)।
अब क्या करें निवेशक? पूरे 8 साल का रखें लक्ष्य!
इस बदले हुए टैक्स माहौल में, जल्दी रिडेम्पशन की टैक्स एफिशिएंसी (Tax Efficiency) काफी कम हो गई है। जो निवेशक 8 साल के पूरे टेन्योर (Tenure) से पहले पैसा निकालना चाहते हैं, उन्हें अब कैपिटल गेन्स टैक्स के कारण नेट रिटर्न (Net Return) में कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, स्टोरेज की चिंता से मुक्ति और सरकारी गारंटी जैसे फायदे होने के बावजूद, एसजीबी उन निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो सकते हैं जिन्हें मध्यम अवधि में लिक्विडिटी (Liquidity) चाहिए। फाइनेंशियल एडवाइजर्स (Financial Advisors) अब निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे SGB को पूरे 8 साल तक रखें, ताकि मैच्योरिटी पर मिलने वाले कैपिटल गेन्स पर टैक्स छूट का पूरा फायदा उठाया जा सके। निवेशकों को अपनी लिक्विडिटी की जरूरत और नए टैक्स नियमों के तहत संभावित आफ्टर-टैक्स रिटर्न (After-tax Return) का सावधानी से आकलन करना होगा।