बजट 2026: SGB टैक्स में बड़ा फेरबदल
सरकार ने Union Budget 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर बड़ा ऐलान किया है। इस बदलाव का मतलब है कि अब उन निवेशकों को कैपिटल गेन्स पर टैक्स में छूट नहीं मिलेगी जो SGBs को सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market) से खरीदते हैं, भले ही वे उन्हें मैच्योरिटी तक होल्ड करें। यह नया नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, जिसका असर असेसमेंट ईयर 2026-27 और उसके बाद आने वाले सालों में होगा।
नियमों में क्या हो रहा है बदलाव?
Union Budget 2026 के प्रस्तावों के तहत, आयकर अधिनियम (Income-tax Act) की धारा 70(1)(x) में संशोधन का प्रस्ताव है। इस बदलाव के बाद, SGBs पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट सिर्फ उन निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने सीधे RBI से बॉन्ड इश्यू के समय सबस्क्राइब किया था और बॉन्ड की अवधि पूरी होने तक उसे अपने पास रखा। पहले, SGBs पर सालाना ब्याज मिलता था और मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स-फ्री होता था, चाहे आपने उन्हें सीधे खरीदा हो या सेकेंडरी मार्केट से। इस नए प्रस्ताव से सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGBs पर टैक्स छूट का लाभ खत्म हो जाएगा।
सरकार के फैसले के पीछे की वजह
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद सभी SGB सीरीज के लिए टैक्स नियमों को एक समान बनाना और टैक्स कानूनों के मूल उद्देश्य के साथ तालमेल बिठाना है। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव टैक्स आर्बिट्रेज (Tax Arbitrage) के अवसरों को रोकने के लिए किया गया है, जो सीधे सबस्क्रिप्शन और सेकेंडरी मार्केट की खरीद के बीच अंतर का फायदा उठाते थे। इससे SGBs को एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट (Long-term Investment) के रूप में बढ़ावा मिलेगा, न कि स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग (Speculative Trading) के साधन के तौर पर।
बाजार पर क्या होगा असर?
इस बदलाव से सेकेंडरी मार्केट में SGBs की ट्रेडिंग पर असर पड़ने की उम्मीद है। जो निवेशक कम या मध्यम अवधि के लिए SGBs खरीदकर कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital Appreciation) का फायदा उठाना चाहते थे, उन्हें अब कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे में, SGBs का टैक्स ट्रीटमेंट (Tax Treatment) अब गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) के करीब आ जाएगा, जिन पर शॉर्ट-टर्म गेन्स पर इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से और लॉन्ग-टर्म गेन्स पर इंडेक्सेशन (Indexation) के साथ 20% टैक्स लगता है। SGBs का वो खास टैक्स-फ्री होने का फायदा अब धीरे-धीरे कम हो रहा है।
RBI की SGB स्कीम का सफर
RBI ने 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत की थी ताकि निवेशकों को फिजिकल गोल्ड रखने का एक विकल्प मिल सके। इसका मकसद फिजिकल गोल्ड की मांग को कम करना और बचत को फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स (Financial Instruments) की ओर मोड़ना था। ऐतिहासिक रूप से, आर्थिक अनिश्चितता या सोने की कीमतों में उछाल के समय निवेशकों की भागीदारी अच्छी रही है। इस नए संशोधन के बाद, SGBs मुख्य रूप से अपने ब्याज के लिए और केवल मूल, लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए टैक्स-फ्री कैपिटल गेन्स के तौर पर आकर्षक रहेंगे। यह फिर से उन्हें एक फिक्स्ड-इनकम (Fixed-income) वाले सॉवरेन सिक्योरिटी (Sovereign Security) के रूप में स्थापित करेगा, न कि एक ऐसी कमोडिटी (Commodity) के तौर पर जिस पर सभी के लिए टैक्स छूट हो।