SEL Manufacturing की हालत खस्ता! भारी नुकसान और ऑडिटर की चेतावनी, कंपनी पर मंडराया 'Going Concern' का खतरा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEL Manufacturing की हालत खस्ता! भारी नुकसान और ऑडिटर की चेतावनी, कंपनी पर मंडराया 'Going Concern' का खतरा
Overview

SEL Manufacturing Company Limited ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जो काफी चिंताजनक हैं। कंपनी को **₹4,074.91 लाख** का भारी नेट लॉस (Net Loss) हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले **154.9%** ज्यादा है। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में भी **54.6%** की भारी गिरावट आई है और यह **₹205.14 लाख** पर आ गया है। ऑडिटर ने कंपनी की 'Going Concern' क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

📉 SEL Manufacturing के नतीजे: गहरी वित्तीय मुसीबत

SEL Manufacturing Company Limited के दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के वित्तीय नतीजे बताते हैं कि कंपनी एक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है। वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में, कंपनी का नेट लॉस (Net Loss) बढ़कर ₹4,074.91 लाख हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹1,598.72 लाख था। यानी, कंपनी को 154.9% ज्यादा का घाटा हुआ है।

मुनाफे में इस बड़ी गिरावट के साथ-साथ कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में भी भारी कमी आई है। पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले रेवेन्यू 54.6% गिरकर सिर्फ ₹205.14 लाख रह गया, जो पहले ₹452.19 लाख था।

🚨 ऑडिटर की चेतावनी: 'Going Concern' पर सवाल

कंपनी के ऑडिटर, Kamboj Malhotra & Associates, ने अपनी रिपोर्ट में एक 'Qualified Opinion' दी है। उन्होंने कहा है कि कंपनी ने अपनी प्रॉपर्टी, प्लांट और इक्विपमेंट (Property, Plant & Equipment) और कैपिटल वर्क इन प्रोग्रेस (Capital Work in Progress) के लिए impairment testing नहीं की है, जिसका असर अभी पता नहीं चल पाया है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ऑडिटर ने कंपनी की 'Going Concern' यानि एक सक्रिय व्यवसाय के तौर पर चलते रहने की क्षमता पर एक 'Material Uncertainty' बताई है। इसका मतलब है कि कंपनी भविष्य में अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा कर पाएगी या नहीं, इस पर गंभीर संदेह है।

🤔 खतरे के संकेत क्या हैं?

  • वर्किंग कैपिटल में कमी: रेजोल्यूशन प्लान के तहत जरूरी वर्किंग कैपिटल (Working Capital) डालने में कंपनी ₹2,500 लाख ही डाल पाई, जबकि ₹6,500 लाख की जरूरत थी।
  • लगातार घाटा: रेजोल्यूशन प्लान लागू होने के बाद से कंपनी लगातार घाटे में चल रही है, जिसका कुल आंकड़ा ₹76,691 लाख तक पहुँच गया है।
  • भारी कर्ज: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹18,743 लाख के बड़े डेट ऑब्लिगेशन्स (Debt Obligations) कंपनी के फंड पर दबाव डाल रहे हैं।
  • प्लांट बंद: कंपनी के बड़े प्लांट पूरी तिमाही बंद रहे और आय का मुख्य जरिया सिर्फ जॉब वर्क (Job Work) बचा है।
  • डिफॉल्ट: कंपनी अपनी तिमाही किश्तों (Quarterly Installments) में ₹26,186 लाख (सितंबर 2023 से दिसंबर 2025 तक) और ब्याज भुगतान (Interest Payments) में ₹17,105 लाख (जुलाई 2023 से दिसंबर 2025 तक) का डिफॉल्ट कर चुकी है।

इन सब गंभीर हालातों को देखते हुए, शेयरहोल्डर्स ने अक्टूबर 2023 में ही इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code), 2016 के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू करने का प्रस्ताव पास कर दिया था।

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