अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) एक नया, काफी हल्का नियामक रुख अपना रहा है, जो वॉल स्ट्रीट की निगरानी कैसे की जाएगी, इसमें एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
लेस-फेअर रेगुलेशन का नया दौर
- नए SEC अध्यक्ष ने कहा है कि आयोग को बाजार नवाचार में बाधा नहीं डालनी चाहिए और वित्तीय बाजारों को फिर से "सांस लेने" देने का वादा किया है, जो डीरेग्यूलेशन की ओर इशारा करता है।
- इस नए दृष्टिकोण में पिछले प्रशासन द्वारा प्रस्तावित कई नियमों को छोड़ना, क्रिप्टोक्यूरेंसी प्लेटफॉर्म पर जांच रोकना, और 2008 के वैश्विक आर्थिक मंदी में योगदान देने वाले जोखिम भरे डेरिवेटिव दांवों का खुलासा करने की आवश्यकता वाले नियम को रद्द करना शामिल है।
- SEC सार्वजनिक कंपनियों के लिए रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को भी सरल बनाने का प्रस्ताव कर रहा है, इस विश्वास के साथ कि कॉर्पोरेट अमेरिका प्रभावी ढंग से स्व-नियमन कर सकता है।
डीरेग्यूलेशन की ऐतिहासिक गूँज
- लेख वर्तमान प्रवृत्ति की तुलना डीरेग्यूलेशन के पिछले अवधियों से करता है जिनसे महत्वपूर्ण वित्तीय संकट पैदा हुए थे।
- उदाहरणों में 1978 में सुप्रीम कोर्ट का "Marquette vs First of Omaha" फैसला, जिसने बैंकों को राष्ट्रव्यापी ब्याज दर निर्यात करने की अनुमति दी, 1980 का Depository Institutions Deregulation and Monetary Control Act, और 1990 के दशक में क्लिंटन प्रशासन द्वारा Glass-Steagall Act को निरस्त करना शामिल है।
- 2000 का कमोडिटी फ्यूचर्स मॉडर्नाइजेशन एक्ट, जिसने डेरिवेटिव सट्टेबाजी पर लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को हटा दिया, उसे भी 2008 के वित्तीय संकट का अग्रदूत बताया गया है।
जोखिम और चिंताएँ
- आलोचकों का तर्क है कि वॉल स्ट्रीट को डीरेग्यूलेट करना यातायात नियम हटाने जैसा है, जिससे एक ऐसी बाज़ार बनेगी जहाँ आम निवेशकों, श्रमिकों और बचतकर्ताओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं होंगे।
- पारंपरिक बैंकिंग क्षेत्रों के बाहर वित्तपोषण गतिविधियों का बढ़ना, जिसमें अमेरिकी और यूरोपीय बैंक खरबों गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों के प्रति उजागर हैं, प्रणालीगत जोखिम को बढ़ाता है।
- क्रिप्टोक्यूरेंसी को "फ्री पास" मिलने और कॉर्पोरेट प्रकटीकरण नियमों को कमजोर करने के बारे में विशेष चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
लेखक का दृष्टिकोण
- कृष्णन रंगनाथन, एक निवेश बैंकर और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र, वर्तमान प्रवृत्ति को सुधार के बजाय एक ऐसे युग में वापसी मानते हैं जहाँ खामियों को अवसर और बेलआउट को व्यावसायिक मॉडल बनाया जाता था।
- वह वर्तमान दृष्टिकोण की तुलना ग्रेट डिप्रेशन के बाद राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट की "वॉल स्ट्रीट पर एक सिपाही" की पहल से करते हैं, और सुझाव देते हैं कि स्व-नियमन करने वाले बाजार समस्याओं की रिपोर्ट करने के बजाय उन्हें छिपाते हैं।
प्रभाव
- हल्के-फुल्के नियमन की ओर यह बदलाव वित्तीय बाजारों में बढ़ी हुई अस्थिरता और जोखिम का कारण बन सकता है, जिससे छोटे निवेशक और बचतकर्ता जो मजबूत सुरक्षा के बिना हैं, प्रभावित हो सकते हैं।
- यह विशेष रूप से क्रिप्टोक्यूरेंसी और जटिल डेरिवेटिव जैसे क्षेत्रों में सट्टा व्यवहार को प्रोत्साहित कर सकता है, जो पिछले वित्तीय संकटों की याद दिलाता है।
- प्रभाव रेटिंग: 8
कठिन शब्दों की व्याख्या
- लेस-फेअर (Laissez-faire): एक आर्थिक दर्शन जो अर्थव्यवस्था में सरकार के न्यूनतम हस्तक्षेप की वकालत करता है। शाब्दिक अर्थ "करने देना" है।
- डेरिवेटिव्स (Derivatives): वित्तीय अनुबंध जिनका मूल्य किसी अंतर्निहित संपत्ति, संपत्तियों के समूह या बेंचमार्क से प्राप्त होता है। इनका उपयोग हेजिंग या सट्टेबाजी के लिए किया जा सकता है।
- सबप्राइम (Subprime): कम क्रेडिट स्कोर वाले उधारकर्ताओं को दिए गए ऋण, जिन्हें चूक का उच्च जोखिम माना जाता है।
- ग्लास-स्टीगल एक्ट (Glass-Steagall Act): 1933 में लागू किया गया एक अमेरिकी बैंकिंग कानून जिसने वाणिज्यिक बैंकिंग और निवेश बैंकिंग गतिविधियों को अलग किया, जिसे बाद में 1999 में काफी हद तक निरस्त कर दिया गया।
- कमोडिटी फ्यूचर्स मॉडर्नाइजेशन एक्ट ऑफ 2000 (Commodity Futures Modernization Act of 2000): एक अमेरिकी संघीय कानून जिसने क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप और अन्य ओवर-द-काउंटर डेरिवेटिव को विनियमन से स्पष्ट रूप से छूट दी।
- हेज फंड्स (Hedge Funds): निजी निवेश फंड जो पूल किए गए धन का उपयोग करते हैं और अपने निवेशकों के लिए सक्रिय रिटर्न अर्जित करने के लिए विभिन्न रणनीतियों को नियोजित करते हैं।
- प्राइवेट क्रेडिट ग्रुप्स (Private Credit Groups): गैर-बैंक ऋणदाता जो कंपनियों को ऋण प्रदान करते हैं, अक्सर उन कंपनियों को जो पारंपरिक बैंकों से वित्तपोषण प्राप्त करने में असमर्थ होती हैं।