सेबी की एक्शन, FPIs के लिए बदले नियम!
सेबी (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए नियमों को आसान बनाने और बाजार तक उनकी पहुंच को सुगम बनाने की दिशा में अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बताया है कि निवेशक समूहों के साथ 77 बैठकों में उनकी लंबी से लंबित मांगों पर गौर किया गया है। इन पहलों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तेज करना, डिजिटल सर्टिफिकेट में सुधार, सुव्यवस्थित 'इंडिया मार्केट एक्सेस' पोर्टल और समान-दिवसीय कैश मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए नेटिंग मैकेनिज्म का आगामी कार्यान्वयन शामिल है। SEBI एक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन भी शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी और दिन के अंत की अस्थिरता कम होगी। ये कदम ऑपरेशनल बाधाओं को कम करने और भारतीय बाजार को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए एक बड़ा प्रयास हैं, जिसका लक्ष्य भारत को एक आकर्षक निवेश स्थल बनाना है।
'इंडिया मार्केट एक्सेस' पोर्टल और नेटिंग का कमाल?
'इंडिया मार्केट एक्सेस' पोर्टल, जिसे सितंबर 2025 में लॉन्च किया गया था, और आने वाले नेटिंग व क्लोजिंग ऑक्शन फ्रेमवर्क का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों के लिए 'बेस्ट-इन-क्लास' एंट्री और ऑपरेटिंग माहौल बनाना है। चेयरमैन पांडे ने यह भी बताया कि जनवरी 2026 तक FPIs की इक्विटी एसेट्स अंडर कस्टडी लगभग ₹71 लाख करोड़ (लगभग $850 बिलियन) तक पहुंच गई थी।
हालांकि, बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने का यह प्रयास अस्थिर FPI फ्लो के बीच हो रहा है। 2025 में कुल ₹1.66 ट्रिलियन ( $18.9 बिलियन ) के बड़े आउटफ्लो के बाद, FPIs ने फरवरी 2026 में भारतीय इक्विटी में ₹22,615 करोड़ ( $2.5 बिलियन ) का निवेश किया, जो 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक इनफ्लो था। इस वापसी का श्रेय एक अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, सुधरे हुए घरेलू वैल्यूएशन और मजबूत Q3 FY26 के कॉर्पोरेट अर्निंग्स को दिया गया, जिनमें 14.7% की वृद्धि हुई थी।
AI की दौड़: ताइवान और साउथ कोरिया का बढ़ता दबदबा
SEBI के ये सुधार एक साथ वैश्विक पूंजी के बदलाव से जूझ रहे हैं। फुर्तीले FPIs अब AI-केंद्रित बाजारों जैसे ताइवान और साउथ कोरिया में अवसरों को तलाश कर टैक्स के बाद के रिटर्न को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ताइवान को 'एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का निर्विवाद वैश्विक केंद्र' माना जाता है, जो विशेष रूप से AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है। अकेले ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) का Taiex इंडेक्स में लगभग 45% हिस्सा है, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन 2026 की शुरुआत में $1.87 ट्रिलियन से $2.00 ट्रिलियन के बीच थी। ताइवान के सेमीकंडक्टर सेक्टर में विदेशी निवेश मजबूत है, जिसका कारण गहरी विशेषज्ञता और मजबूत नीतिगत समर्थन है।
इसी तरह, साउथ कोरिया का AI बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, खासकर मेमोरी चिप्स में अपनी ताकत और महत्वपूर्ण FDI से प्रेरित है। AI निवेश में भारी वृद्धि के साथ 2025 में FDI रिकॉर्ड $36.05 बिलियन तक पहुंच गया। वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में कोरिया और ताइवान का दबदबा बढ़ रहा है, जो अन्य उभरते बाजारों से काफी पूंजी खींच रहा है।
चुनौती: FPI की हिस्सेदारी में गिरावट और अन्य बाधाएं
SEBI के प्रयासों और हालिया इनफ्लो के बावजूद, दिसंबर 2025 तिमाही में भारतीय इक्विटी में FPI की हिस्सेदारी घटकर 16.7% हो गई, जो 15 वर्षों से अधिक का सबसे निचला स्तर है। यह दर्शाता है कि भले ही सुधार अस्थायी फ्लो को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन 'चिपकने वाली' (sticky) संस्थागत पूंजी को आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मुद्रा में लगातार अस्थिरता, जिसमें USD/INR पिछले 12 महीनों में 4.12% घटकर जनवरी 2026 में 92.29 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, एक निरंतर बाधा प्रस्तुत करता है। इसके अलावा, भारतीय IT सेक्टर, जो पारंपरिक रूप से विदेशी पूंजी को आकर्षित करता रहा है, चुनौतियों का सामना कर रहा है। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) 2026 में भारतीय IT सेवाओं के लिए केवल मध्यम-एकल-अंकीय राजस्व वृद्धि का अनुमान लगा रही है। LTIMindtree जैसी कंपनियों ने विभिन्न लागतों के कारण Q3 FY26 में 30.7% का नेट प्रॉफिट डिक्लाइन दर्ज किया है। यह सेक्टर-विशिष्ट चिंता, AI-प्रेरित व्यवधान और ऊंचे वैल्यूएशन की चिंताओं के साथ मिलकर, FPIs को टेक्नोलॉजी स्टॉक्स से विनिवेश करने के लिए प्रेरित कर रही है, जैसा कि फरवरी 2026 में देखा गया।
आगे की राह: घरेलू सुधारों और वैश्विक पूंजी की जुगलबंदी
SEBI का व्यापक सुधार पैकेज विदेशी निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का एक साथ मजबूत होना, जिन्होंने ₹7.88 लाख करोड़ का निवेश करके 2025 में महत्वपूर्ण FPI आउटफ्लो को अवशोषित किया, बाजार स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण बफर प्रदान करता है।
हालांकि, निरंतर विदेशी पूंजी को आकर्षित करना न केवल नियामक आसानी पर निर्भर करता है, बल्कि भारत की उच्च-मूल्य वाली वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर्स, विशेष रूप से AI, में विकसित होने और प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर भी निर्भर करता है, जहां ताइवान और कोरिया जैसे स्थापित हब वर्तमान में एक प्रमुख स्थान रखते हैं। जबकि डेट मार्केट इनफ्लो ने लचीलापन दिखाया है, FPI इक्विटी फ्लो का दीर्घकालिक प्रक्षेपवक्र संभवतः निरंतर आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धी तकनीकी विकास और एक स्थिर भू-राजनीतिक और मुद्रा वातावरण के संगम पर निर्भर करेगा जो वैश्विक टेक ग्रोथ स्टोरीज़ के आकर्षण का मुकाबला कर सके।