SEBI का बड़ा सुधार प्रस्ताव
SEBI म्युनिसिपल बॉन्ड के पूरे ढांचे को बदलने की तैयारी में है। यह कदम देश में बढ़ती शहरीकरण की ज़रूरत को पूरा करने और शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए कैपिटल (Capital) को अनलॉक करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। नियामक के कंसल्टेशन पेपर (Consultation Paper) में कई अहम बदलावों का सुझाव दिया गया है, जिनका मकसद शहरों के लिए डेट (Debt) जारी करना और निवेशकों के लिए खरीदना ज़्यादा आसान बनाना है।
पूल्ड फाइनेंस व्हीकल और रिफाइनेंसिंग
प्रस्तावों में पूल्ड फाइनेंस व्हीकल (Pooled Finance Vehicle) की शुरुआत भी शामिल है। इसके ज़रिए, दो या उससे ज़्यादा नगरपालिकाएं मिलकर एक स्पेशल पर्पज़ व्हीकल (Special Purpose Vehicle - SPV) के तहत फंड जुटा पाएंगी। यह व्यवस्था छोटे शहरों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकती है, जिन्हें अकेले डेट मार्केट (Debt Market) तक पहुंचने में अक्सर दिक्कत आती है। SEBI यह भी विचार कर रहा है कि म्युनिसिपल बॉन्ड का इस्तेमाल मौजूदा कर्जों को रिफाइनेंस करने के लिए भी किया जा सके। इससे नगरपालिकाओं को अपने फाइनेंस को मैनेज करने में ज़्यादा लचीलापन मिलेगा और संभवतः उनके कर्ज लेने की लागत भी कम हो सकती है।
निवेशकों को लुभाने और बाज़ार पहुंच
ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए, SEBI ने इन सिक्योरिटीज (Securities) के लिए न्यूनतम फेस वैल्यू (Face Value) तय करने का सुझाव दिया है, जो ₹1 लाख या ₹10,000 हो सकती है। ₹10,000 के बॉन्ड के लिए फिक्स्ड मैच्योरिटी (Fixed Maturity) ज़रूरी होगी और स्ट्रक्चर्ड ऑब्लिगेशन्स (Structured Obligations) इसमें शामिल नहीं होंगे। नियामक रिटेल निवेशकों (Retail Investors) और सीनियर सिटीजन्स (Senior Citizens) जैसे वर्गों के लिए इंसेंटिव (Incentives) की भी तलाश कर रहा है, जैसा कि पब्लिक डेट ऑफरिंग्स (Public Debt Offerings) को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रणनीतियों में देखा गया है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक 22 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन्स (Municipal Corporations) 31 इश्यूज (Issuances) के ज़रिए करीब ₹4,540.34 करोड़ जुटा चुकी हैं, जो दर्शाता है कि इस बाजार में सुधार की काफी गुंजाइश है।
