SEBI का शिकंजा, रुपया मजबूत! विदेशी निवेश के नियम सख्त, डॉलर पर निर्भरता कम करने की बड़ी तैयारी

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का शिकंजा, रुपया मजबूत! विदेशी निवेश के नियम सख्त, डॉलर पर निर्भरता कम करने की बड़ी तैयारी
Overview

भारत का वित्तीय बाज़ार दो बड़े मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ, SEBI विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए नियम कड़े कर रहा है और हितों के टकराव (conflict of interest) पर लगाम लगा रहा है। दूसरी तरफ, भारत अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए रुपये में व्यापार (rupee trade) और करेंसी स्वैप (currency swap) को बढ़ावा दे रहा है।

SEBI का बाजार इंटीग्रिटी पर फोकस

बाजार नियामक SEBI ने मार्केट की इंटीग्रिटी (integrity) और निवेशकों के भरोसे को मज़बूत करने के लिए कई बड़े नियम मंजूर किए हैं। इनमें SEBI के टॉप अफसरों और उनके परिवारों के लिए हितों के टकराव (conflict of interest) को लेकर कड़े नियम शामिल हैं। इसके तहत विस्तृत जानकारी देनी होगी, निवेश की सीमाएं तय होंगी और अफसर संबंधित फैसलों से खुद को अलग रखेंगे। इसके लिए एक नया ऑफिस ऑफ एथिक्स एंड कंप्लायंस (Office of Ethics and Compliance) भी बनाया गया है।

SEBI ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (FPI) के कैश मार्केट ट्रेड के लिए नेटिंग (netting) सिस्टम को भी मंजूरी दी है। यह विदेशी निवेशकों को एक ही दिन के खरीद-बिक्री के सौदों को आपस में एडजस्ट (offset) करने की सुविधा देगा, जिससे ऑपरेशनल कदम और लागतें कम होंगी। यह सिस्टम 31 दिसंबर, 2026 तक लागू होने की उम्मीद है। SEBI बाजार में हेरफेर (manipulation) के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर रहा है, जिसमें 1.33 लाख से ज्यादा भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट पर एक्शन शामिल है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.