SEBI का बड़ा दांव: FPIs के लिए लाया नेट सेटलमेंट, विदेशी निवेश बढ़ाने की तैयारी

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का बड़ा दांव: FPIs के लिए लाया नेट सेटलमेंट, विदेशी निवेश बढ़ाने की तैयारी
Overview

भारतीय बाजारों के नियामक SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए एक बड़ा फैसला सुनाया है। SEBI ने ऐलान किया है कि अब FPIs कैश मार्केट के ट्रेड्स के लिए नेट सेटलमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह सिस्टम 31 दिसंबर, 2026 तक लागू हो जाएगा, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए ऑपरेशनल खर्चे कम होंगे और लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ेगी।

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FPIs के लिए राह होगी आसान, कम होगी लिक्विडिटी की जरूरत

SEBI का यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। नेट सेटलमेंट सिस्टम के तहत, FPIs अब अपने कैश मार्केट ट्रांजैक्शन में खरीदे और बेचे गए शेयरों के भुगतान को आपस में एडजस्ट (offset) कर पाएंगे। इसका मतलब है कि उन्हें हर खरीद के लिए पूरा फंड ब्लॉक करने या हर बिक्री के लिए अलग से शेयर डिलीवर करने की जरूरत नहीं होगी। ग्रॉस सेटलमेंट (Gross Settlement) सिस्टम में, जहां हर ट्रांजैक्शन का अलग से निपटान होता है, फंड अनावश्यक रूप से फंसे रह सकते थे, जिससे फॉरेन एक्सचेंज की लागत बढ़ जाती थी।

यह बदलाव खासतौर पर तब मददगार होगा जब बाजार में ज्यादा हलचल हो, जैसे इंडेक्स रीबैलेंसिंग (Index Rebalancing) के दिनों में, जब लिक्विडिटी की मांग अचानक बढ़ जाती है। भारतीय इक्विटी मार्केट, जिसका P/E रेश्यो करीब 21.35 है और मार्केट कैप लगभग $4.4 ट्रिलियन है, हाल के दिनों में FPIs से बड़े आउटफ्लो (Outflows) का सामना कर रहा है। मार्च 2026 में अकेले ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का आउटफ्लो देखा गया था। हालांकि, 24 अप्रैल, 2026 के आसपास लगभग $106 मिलियन का मामूली इनफ्लो (Inflow) दर्ज किया गया था, पर निवेशकों की भावना अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। उस समय Nifty 50 करीब 23,900 और Sensex करीब 76,700 पर थे। इस नए नियम से ट्रेडिंग की इन बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।

उभरते बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

SEBI की यह पहल भारत को उभरते बाजारों (Emerging Markets) के बीच एक और भी आकर्षक निवेश गंतव्य बनाने की रणनीति का हिस्सा है। SEBI पहले भी FPI रजिस्ट्रेशन और डिस्क्लोजर नियमों को आसान बना चुका है ताकि कैपिटल इनफ्लो को बढ़ावा मिल सके। इस बार, FPIs से मिले फीडबैक पर ध्यान देते हुए, SEBI की कोशिश है कि भारत का ट्रेडिंग फ्रेमवर्क अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में और बेहतर और आकर्षक लगे। यह ऐसे समय में हो रहा है जब ग्लोबल निवेशक काफी सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं और ऐसे बाजारों को तरजीह दे रहे हैं जहां नियम स्पष्ट हों और ऑपरेशनल अड़चनें कम हों। विदेशी निवेशकों के लिए वित्तीय बाधाओं को कम करना महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब वैश्विक आर्थिक बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव बाजार में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।

संभावित जोखिम और निवेशक की सावधानी

ऑपरेशनल फायदों के बावजूद, कुछ कस्टोडियंस (Custodians) और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन्स (Clearing Corporations) ने चिंताएं जताई हैं। उनका मानना है कि इससे ट्रेड रिजेक्शन (Trade Rejections) का खतरा बढ़ सकता है और सेटलमेंट रिस्क FPIs से कस्टोडियंस पर शिफ्ट हो सकता है। पीक ट्रेडिंग आवर्स (Peak Trading Hours) के दौरान क्लियरिंग सिस्टम पर भी ज्यादा दबाव आ सकता है। इसके अलावा, FPIs का रुख अभी भी सतर्क है। ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताएं और भू-राजनीतिक मुद्दे अभी भी चिंता का सबब बने हुए हैं। भले ही IT जैसे सेक्टर AI के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हों, लेकिन फाइनेंशियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स अभी भी कुछ विदेशी रुचि आकर्षित कर रहे हैं। हालिया मामूली इनफ्लो यह दर्शाता है कि व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक, अकेले सेटलमेंट प्रक्रियाओं की तुलना में, निवेशक के भरोसे पर ज्यादा भारी पड़ रहे हैं। 2024 के अंत से FPIs की बिकवाली का ट्रेंड जारी है, जो दिखाता है कि SEBI निवेश को आसान बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अंततः वैश्विक और घरेलू आर्थिक नैरेटिव ही कैपिटल फ्लो को आकार देंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.