ग्रामीण भारत का क्लीन फ्यूल मिशन खतरे में: आसमान छूती ऊर्जा लागतें फिर बायोमास की ओर धकेल रहीं!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ग्रामीण भारत का क्लीन फ्यूल मिशन खतरे में: आसमान छूती ऊर्जा लागतें फिर बायोमास की ओर धकेल रहीं!
Overview

ग्रामीण भारत में ऊर्जा की बढ़ती कीमतें आम लोगों के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गई हैं। बढ़ती लागतों के चलते, कई परिवार अब भी पारंपरिक बायोमास (Biomass) ईंधन पर निर्भर रहने को मजबूर हैं, जिससे सरकार के क्लीन फ्यूल (Clean Fuel) को बढ़ावा देने के प्रयासों को झटका लग रहा है।

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बढ़ती लागतों का झटका

आर्थिक असमानता का आलम ये है कि सरकारी प्रयास के बावजूद, ग्रामीण भारत के कई घर अभी भी बायोमास पर टिके हैं। इसकी वजह साफ है - क्लीन फ्यूल की लागतें, परिवारों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। एनर्जी की बढ़ती कीमतें, लोगों के बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं, और देश की ग्रामीण आबादी के लिए 'एनर्जी सिक्योरिटी' (Energy Security) एक दूर का सपना बनती जा रही है।

एनर्जी की बढ़ती कीमतें आम आदमी की कमर तोड़ रही हैं

हालिया आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण भारत में एनर्जी की कीमतें आसमान छू रही हैं। 2011-12 से 2023-24 के बीच, प्रति व्यक्ति एनर्जी (ईंधन, बिजली, और ट्रांसपोर्ट) पर औसत मासिक खर्च लगभग 224% बढ़कर ₹565 हो गया है। यह अब कुल घरेलू खर्च का 13.7% हो गया है, जबकि इसी अवधि में भोजन पर खर्च सिर्फ 156% बढ़ा है। ऊर्जा की ये बढ़ती लागतें घरों पर भारी बोझ डाल रही हैं, जिससे अन्य ज़रूरतों के लिए पैसे कम हो रहे हैं और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियों में भी सुस्ती आ सकती है।

उज्ज्वला योजना: कनेक्शन है, पर इस्तेमाल कितना?

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) ने मई 2016 में लॉन्च होने के बाद से LPG कनेक्शन की संख्या में भारी बढ़ोतरी की है, जिसमें 103.4 मिलियन से अधिक लाभार्थी शामिल हैं। लेकिन, सिर्फ कनेक्शन होना ही काफी नहीं है। कई ग्रामीण परिवार, PMUY लाभार्थियों सहित, अभी भी सॉलिड बायोमास ईंधन का ही इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि LPG रिफिल (Refill) बहुत महंगी पड़ती है। एक सिंगल रिफिल की कीमत अक्सर घर के मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा, लगभग ₹920 तक हो सकती है। इस लागत की वजह से लोग LPG का इस्तेमाल सीमित रखते हैं, जैसे सिर्फ चाय बनाने के लिए, जबकि खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से बायोमास ही इस्तेमाल होता है।

बायोमास का दबदबा कायम

हालांकि LPG सरकार की मुख्य क्लीन फ्यूल प्राथमिकता है, लेकिन लगातार बनी हुई affordability की दिक्कत दूसरे विकल्पों में रुचि जगा रही है। इंप्रूव्ड कुकस्टोव (Improved Cookstoves - ICS) पारंपरिक चूल्हों की तुलना में बायोमास को ज़्यादा कुशलता से जलाते हैं, जिससे ईंधन की खपत और प्रदूषण कम होता है, और यह LPG रिफिल से काफी सस्ता भी है। साथ ही, कंप्रेस्ड बायोगैस (Compressed Biogas - CBG) प्रोजेक्ट भी बढ़ रहे हैं, जो खेती के कचरे और गोबर से ईंधन बनाते हैं। फिर भी, बायोमास का इस्तेमाल काफी गहरा है, खासकर छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां इसका उपयोग 72.5% से लेकर 84% से भी अधिक है। इस निर्भरता से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में भारी वृद्धि होती है, जो सालाना 340 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, यानी भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 13%

कार्यान्वयन में बाधाएं और लागत की अड़चनें

क्लीन फ्यूल प्रोग्रामों के प्रभावी कार्यान्वयन में कई सिस्टमैटिक दिक्कतें आ रही हैं। PMUY लाभार्थियों की सही पहचान न हो पाना, ज़रूरी दस्तावेज़ों की कमी, और दूरदराज के इलाकों में LPG डिलीवरी रूट की सीमित उपलब्धता जैसी समस्याओं से बड़े गैप पैदा होते हैं। LPG रिफिल की आवर्ती लागत (Recurring Cost) लगातार इस्तेमाल में सबसे बड़ी बाधा है, जिसकी कीमत अक्सर घरों की क्षमता से ज़्यादा होती है। नतीजतन, रिफिल दरें कम हैं, PMUY लाभार्थियों के लिए सालाना औसतन सिर्फ 3-4 सिलेंडर ही होते हैं, जो राष्ट्रीय औसत 6 से काफी कम है। यह लगातार महंगापन लाखों लोगों को बायोमास के इस्तेमाल में फंसाए हुए है, जिससे घर के अंदर वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य जोखिम और पर्यावरणीय नुकसान बढ़ रहा है। ऊर्जा लागतों का बढ़ता बोझ, जो सामान्य खर्चों से भी तेज़ी से बढ़ रहा है, यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्रय शक्ति (Purchasing Power) लगातार सीमित हो रही है, जो आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए एक दीर्घकालिक जोखिम है।

affordability की चुनौती से निपटना

क्लीन फ्यूल की पहुंच और उसके वास्तविक, निरंतर उपयोग के बीच की लगातार खाई, affordability और विश्वसनीयता पर केंद्रित नीतियों की आवश्यकता को उजागर करती है। जबकि PMUY ने कनेक्शन बढ़ाए हैं, भविष्य की रणनीतियों को रिफिल को किफायती बनाना चाहिए, लागत प्रभावी विकल्पों की तलाश करनी चाहिए, और निरंतर उपलब्धता के लिए मजबूत सप्लाई चेन (Supply Chain) सुनिश्चित करनी चाहिए। बायोमास समाधानों और CBG का विकास क्षमता प्रदान करता है, लेकिन भारत की विशाल ग्रामीण आबादी के लिए एनर्जी affordability गैप को पाटना टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.