विक्षित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू हो गया है। इसके तहत अब हर साल **125** दिनों के काम की गारंटी मिलेगी और औसत दिहाड़ी मजदूरी बढ़ाकर **₹327.4** कर दी गई है। इस मिशन के लिए **₹95,692** करोड़ का बजट तय किया गया है, जिससे ग्रामीण खर्च बढ़ने की उम्मीद है।
नई शुरुआत: रोजगार के दिन और मजदूरी में बढ़ोतरी
1 जुलाई 2026 से विक्षित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू हो चुका है। इस नए कानून के तहत, ग्रामीण इलाकों में रोजगार गारंटी स्कीम में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब लाभार्थियों को पहले के 100 दिनों के मुकाबले सालाना 125 दिनों के काम की गारंटी मिलेगी। साथ ही, राष्ट्रीय औसत दिहाड़ी मजदूरी को ₹298.8 से बढ़ाकर ₹327.4 कर दिया गया है।
पूरे देश में एक समान भुगतान सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने ₹300 प्रति दिन की न्यूनतम दिहाड़ी तय की है। इस बदलाव से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे कई राज्यों में मजदूरी दर में 15% से 25% तक की वृद्धि देखी जा रही है।
ग्रामीण खर्च पर सीधा असर
इस अधिनियम का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जब ग्रामीण परिवारों के पास काम के ज्यादा दिन और बेहतर दिहाड़ी होगी, तो उनकी खर्च करने की क्षमता (Disposable Income) बढ़ेगी। इससे कंज्यूमर-फेसिंग कंपनियों के लिए एक अच्छा माहौल बनेगा।
ऐतिहासिक रूप से, ग्रामीण आय में वृद्धि से फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) जैसे पैक फूड और पर्सनल केयर आइटम्स की मांग बढ़ी है। इसके अलावा, टू-व्हीलर (दोपहिया वाहन) सेक्टर भी ग्रामीण मांग पर बारीक नज़र रखता है, क्योंकि ये वाहन ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन का मुख्य साधन हैं। यह एक्ट इन कंपनियों की सफलता की गारंटी नहीं देता, लेकिन वॉल्यूम ग्रोथ के लिए एक सपोर्टिव माहौल जरूर बनाता है।
बजट का ऐलान
इस बड़े कार्यक्रम को लागू करने के लिए, सरकार ने ₹95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट आवंटित किया है। यह फंड सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मजदूरी भुगतान और परिचालन खर्चों को कवर करने के लिए है। निवेशकों के लिए, इस खर्च का पैमाना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संरक्षण और सशक्तिकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा वित्तीय कदम है।
निवेशक किन सेक्टर्स पर नज़र रखें?
निवेशक आमतौर पर इन सेक्टर्स पर नज़र रखते हैं, क्योंकि ग्रामीण रोजगार नीति में बदलाव का इन पर असर पड़ता है:
- FMCG: ग्रामीण भारत में मजबूत वितरण नेटवर्क वाली कंपनियों की बिक्री में सुधार देखा जा सकता है।
- टू-व्हीलर्स: यह सेगमेंट ग्रामीण समृद्धि के प्रति बहुत संवेदनशील है। ग्रामीण श्रमिकों के लिए स्थिर आय से वाहनों की खरीद और बदलने की साइकिल को समर्थन मिल सकता है।
- ग्रामीण वित्तीय सेवाएं: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) और माइक्रोफाइनेंस संस्थान, जो ग्रामीण परिवारों को लोन देते हैं, वे घरेलू नकदी प्रवाह (Cash Flow) स्थिर होने पर ऋण की मांग और पुनर्भुगतान के रुझानों में बदलाव देख सकते हैं।
आगे क्या देखें?
इस योजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि यह ज़मीनी स्तर पर कितनी कुशलता से लागू होती है। महत्वपूर्ण बातों में फंड का राज्यों को वितरण, ज़मीनी स्तर पर रोजगार सृजन की गति और क्या मजदूरी वृद्धि से ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखलाओं में महंगाई बढ़ेगी, ये शामिल हैं। इसके अलावा, निवेशक यह देखने के लिए खपत-केंद्रित कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन अपडेट की निगरानी करेंगे कि क्या ग्रामीण मांग के रुझान नए एक्ट के तहत उच्च मजदूरी और काम की गारंटी के अनुरूप होने लगते हैं।
