ग्लोबल अनिश्चितता का असर
दुनिया भर में मची इकोनॉमिक उथल-पुथल का सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Markets) की मुद्राओं पर पड़ रहा है, और Indian Rupee भी इससे अछूता नहीं है। 1 फरवरी 2026 तक, डॉलर के मुकाबले रुपया 91.68 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो हाल के महीनों में एक अहम गिरावट को दर्शाता है। देश के टॉप इकोनॉमिक एडवाइजर का मानना है कि इस कमजोरी की जड़ें बाहरी हैं और इसे घरेलू आर्थिक नीतियों की खामी नहीं माना जा सकता।
CEA की नजर में असली वजह
चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर V. Anantha Nageswaran के मुताबिक, रुपये का मौजूदा वैल्यूएशन ग्लोबल अनिश्चितता और लगातार बदलते कैपिटल फ्लो को दिखाता है। उन्होंने साफ किया कि बजट जैसे छोटे अवधि के उपायों से इन बाहरी ताकतों का सीधा मुकाबला नहीं किया जा सकता। Nageswaran ने कहा कि रुपया 'अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन' (punching below its weight) कर रहा है, यानी इसकी मार्केट वैल्यू शायद देश की असली आर्थिक ताकत को पूरी तरह नहीं दर्शाती। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि गिरती करेंसी वैल्यू ग्लोबल टैरिफ के असर को कम करने और विदेशी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय एक्सपोर्ट को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करती है। हाल ही में पेश हुए यूनियन बजट 2026-27 के बाद मार्केट में शुरुआती अस्थिरता देखी गई थी, जिसमें डेरिवेटिव्स और बायबैक पर प्रस्तावित टैक्स बदलावों के कारण Sensex और Nifty में गिरावट आई थी।
विश्लेषण: भारत की संवेदनशीलता और एक्सपोर्ट की मजबूती
एक कैपिटल-इंपोर्टिंग देश के तौर पर, भारत की करेंसी ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट और भू-राजनीतिक घटनाओं में बदलावों के प्रति बेहद संवेदनशील है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल में कैपिटल इनफ्लो की निश्चितता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले 12 महीनों में रुपया करीब 5.70% कमजोर हुआ है और जनवरी 2026 में यह 92.29 के ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंचा था। इसके बावजूद, सरकार का मानना है कि यह माहौल देश की ग्रोथ के लक्ष्यों के साथ काफी हद तक मेल खाता है। एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस इस स्थिति में एक अहम सहारा बना हुआ है। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि बाहरी दबावों के बावजूद भारतीय एक्सपोर्ट में मजबूती बनी हुई है। 2024-25 में भारत का गुड्स और सर्विसेज का कुल एक्सपोर्ट ₹825.25 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था और यह 2026 तक स्थिर ग्रोथ के लिए तैयार है, जिसे मार्केट डायवर्सिफिकेशन और आने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का सहारा मिलेगा। देश का इकोनॉमिक सर्वे FY26 के लिए 7.4% और FY27 के लिए 6.8-7.2% की मजबूत ग्रोथ का अनुमान लगाता है, जो भारत को एक खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत परफॉर्मर के रूप में स्थापित करता है। 31 जनवरी 2026 को इंडिया SENSEX का P/E रेशियो 22.640 था, जो इक्विटी मार्केट के वैल्यूएशन का संकेत देता है। वैश्विक व्यापार की गतिशीलता और अमेरिकी टैरिफ के जवाब में, भारत ने कैपिटल गुड्स और कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी में भी कटौती की है, जिसका मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाना है। CEA ने अमेरिका के साथ ट्रेड टैरिफ विवादों का समाधान ग्लोबल सेंटीमेंट को मजबूत करने और उभरते बाजारों में कैपिटल फ्लो के दबाव को कम करने वाला एक अहम फैक्टर बताया है।
भविष्य की राह
Nageswaran ने आगाह किया कि बजट के तत्काल प्रभाव रुपये की दिशा पर पड़ने की संभावना कम है, क्योंकि करेंसी की चाल सीधे फिस्कल आंकड़ों में तब्दील नहीं होती। रुपये के आउटलुक में टिकाऊ सुधार को घरेलू नीतियों के बजाय ग्लोबल सेंटीमेंट के बड़े रीकैलिब्रेशन से प्रेरित होने की उम्मीद है। सरकार को देश के मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल्स और वैश्विक उतार-चढ़ावों से निपटने की क्षमता पर भरोसा बना हुआ है।