रुपया फिसला, पर भारत-अमेरिका डील का बड़ा दांव | Rupee Vs Trade Deal

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AuthorAditya Rao|Published at:
रुपया फिसला, पर भारत-अमेरिका डील का बड़ा दांव | Rupee Vs Trade Deal
Overview

भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा ट्रेड एग्रीमेंट होने के बावजूद, भारतीय रुपया आज सुबह कमजोर खुला। कल की बड़ी तेजी के उलट, कॉर्पोरेट्स की डॉलर खरीद के चलते रुपया **22 पैसे** गिरकर **90.54** के स्तर पर आ गया।

करेंसी में तुरंत गिरावट, डील के उत्साह पर भारी?

आज, 4 फरवरी 2026 की सुबह, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे लुढ़ककर 90.54 पर कारोबार कर रहा है। यह गिरावट कल की तूफानी तेजी के बिल्कुल विपरीत है, जब डील की घोषणा के बाद रुपया 125 पैसे उछलकर 7 साल के उच्चतम स्तर 90.26 पर बंद हुआ था। डीलरों का कहना है कि कॉर्पोरेट्स और इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की जोरदार मांग और समझौते के फाइनल डॉक्यूमेंटेशन को लेकर बनी अनिश्चितता, रुपये में इस तुरंत गिरावट के मुख्य कारण हैं। मंगलवार को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की ओर से ₹5,236.28 करोड़ का भारी इनफ्लो देखा गया था, लेकिन डील के ड्राफ्ट का इंतजार मार्केट को अभी भी बेचैन किए हुए है।

स्ट्रेटेजिक शिफ्ट: टैरिफ में कटौती और एनर्जी सप्लाई

हाल ही में हुए भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती है। भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इस कदम से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है, खासकर तब जब अन्य एशियाई देशों के सामानों पर 20% से 30% तक का टैरिफ लगता है। टैरिफ में कटौती के अलावा, यह डील भारत की एनर्जी इंपोर्ट पॉलिसी में एक महत्वपूर्ण बदलाव का भी संकेत देती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने रूसी कच्चे तेल (Russian crude oil) की खरीद धीरे-धीरे बंद करने पर सहमति जताई है, जो कि अब तक ट्रेड नेगोशिएशन में एक बड़ी बाधा थी। इसके बजाय, भारत अब अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्ट्स का आयात बढ़ाएगा। इस एनर्जी डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजी में अमेरिकी मंजूरी के साथ वेनेजुएला से क्रूड ऑयल का आयात भी शामिल हो सकता है। यह भारत के लिए स्थिर और सस्ती एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स (जो डॉलर की मजबूती मापता है) में मामूली 0.03% की बढ़ोतरी के साथ यह 97.4143 पर पहुंच गया, वहीं ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स $67.78 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहे थे।

अलग-अलग राय: फिस्कल चिंताओं का साया

ट्रेड डील ने विदेशी निवेश के लिए सकारात्मक माहौल जरूर बनाया है, लेकिन रुपये के लॉन्ग-टर्म आउटलुक पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। MUFG के एनालिस्ट्स 2026 में रुपये के कमजोर रहने की आशंका जता रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की फिस्कल कंसॉलिडेशन की रफ्तार धीमी है और बरोइंग की जरूरतें बढ़ेंगी, जिसका असर बॉन्ड मार्केट्स और फॉरेन इन्वेस्टमेंट इनफ्लो पर पड़ सकता है। वहीं, HSBC के एनालिस्ट्स का मानना है कि ट्रेड डील के पॉजिटिव सेंटीमेंट के कारण रुपया फिलहाल "थोड़ा अंडरवैल्यूड" है और मार्च के अंत तक 88 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, Barclays के स्ट्रेटेजिस्ट्स का कहना है कि मंगलवार की तेजी बनी रहने वाली नहीं है, क्योंकि डील की पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है और पिछले साल 7% तक गिराने वाले फैक्टर्स अभी भी मौजूद हैं। उम्मीद है कि आरबीआई (RBI) अपनी अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) मीटिंग में इंटरेस्ट रेट्स को स्थिर रखेगा, क्योंकि ट्रेड डील के बाद तत्काल किसी बड़े इकोनॉमिक स्टिमुलस की जरूरत कम हो गई है। भारतीय इक्विटी मार्केट्स की बात करें तो, BSE Sensex का P/E रेश्यो लगभग 23.0 है, जबकि Nifty 50 के कंपोनेंट्स का मीडियन P/E 31.93 है। BSE Sensex की मार्केट कैप लगभग ₹1.67 करोड़ है।

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