भारतीय रुपया (Indian Rupee) गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली **0.1%** चढ़कर **96.49** पर खुला। RBI के दखल के बावजूद, **$100** प्रति बैरल के करीब पहुँचते कच्चे तेल की कीमतें रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं।
Detailed Coverage
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर
वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतें छह हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं, जिसकी मुख्य वजह लाल सागर (Red Sea) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग मार्गों को लेकर सुरक्षा चिंताएं हैं। चूंकि भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए ऊँची वैश्विक कीमतों का मतलब है कि तेल के भुगतान के लिए ज़्यादा डॉलर खर्च करने होंगे। डॉलर की यह लगातार बढ़ती मांग, भारतीय शेयर बाज़ार (Indian equity markets) और बॉन्ड बाज़ार (debt markets) में आने वाले विदेशी निवेश (foreign capital inflows) के सकारात्मक असर को भी बेअसर कर रही है।
RBI का Forex मार्केट में दखल
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा बाज़ार (forex market) में सक्रिय रूप से दखल दे रहा है ताकि रुपये में ज़्यादा उतार-चढ़ाव को रोका जा सके। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, RBI ने अप्रैल में $8.9 बिलियन की आक्रामक बिकवाली के बाद मई में फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में $6.1 बिलियन की नेट बिकवाली की है। ये कदम बाज़ार में लिक्विडिटी बनाए रखने और अचानक गिरावट को रोकने के लिए उठाए गए हैं, हालांकि मौजूदा ग्लोबल एनर्जी की कीमतों के माहौल में इनकी असरदारिता परखी जा रही है।
बाज़ार का व्यापक परिदृश्य
रुपये पर दबाव के बावजूद, विदेशी निवेश के रुझानों (Foreign investment trends) में कुछ लचीलापन देखा गया है। साल की शुरुआत में इक्विटी से आउटफ्लो (equity outflows) के बावजूद, हाल के महीनों में कई सेंट्रल बैंक और पॉलिसी उपायों के समर्थन से भारतीय बॉन्ड और इक्विटी बाज़ार दोनों में विदेशी निवेश में वापसी हुई है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) अभी भी काफी अच्छी स्थिति में है, जो RBI को लगभग 10 महीनों के आयात को कवर करने की पर्याप्त क्षमता प्रदान करता है। यह स्थिति बाज़ार में अत्यधिक अस्थिरता के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करती है।
घरेलू मोर्चे पर, शेयर बाज़ार (equity markets) गुरुवार सुबह थोड़ी सावधानी के साथ कारोबार कर रहे थे। BSE Sensex 0.31% नीचे था और Nifty50 इंडेक्स 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया था। आगे चलकर, बाज़ार के प्रतिभागी क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और RBI की करेंसी मार्केट में रणनीति पर नज़र रखेंगे, क्योंकि ये कारक तय करेंगे कि निकट भविष्य में रुपया 96.50–96.70 की अनुमानित सीमा के भीतर रहेगा या नहीं।
