अमेरिकी टैरिफ में कटौती का बड़ा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ (Tariff) को घटाकर 18% करने की घोषणा के बाद मंगलवार को इंडियन रुपया (Indian Rupee) में जबरदस्त तेजी देखी गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 1.36% चढ़कर 90.27 के स्तर पर आ गया, जो कि दिसंबर 2018 के बाद का सबसे अच्छा एकदिनी प्रदर्शन है। इस खबर से भारतीय बाजारों से जुड़े एसेट्स पर से दबाव कम हुआ। इस दौरान रुपया अन्य एशियाई मुद्राओं से बेहतर रहा, जहां मलेशियाई रिंगित 0.34% और इंडोनेशियाई रुपिया 0.19% ही बढ़े। हालांकि, इस शानदार रिकवरी के बावजूद, रुपया फाइनेंशियल ईयर 2026 में अब तक 7% से अधिक की गिरावट के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई करेंसी बनी हुई है।
RBI का दखल और आगे की राह
बाजार के जानकारों का मानना है कि टैरिफ (Tariff) में कटौती से मिली राहत भले ही तात्कालिक हो, लेकिन रुपये की मजबूती पर इसके असर पर सवाल बने हुए हैं। नोमुरा (Nomura) जैसी ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि इस ट्रेड डील का सपोर्ट शायद ज्यादा दिन न टिके। इसकी मुख्य वजहें हैं – रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserve) बढ़ाना और विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) का दूसरे एसेट्स पर ज्यादा फोकस।
RBI का मकसद रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकना है। इसके लिए वह जरूरत पड़ने पर फॉरेक्स मार्केट में दखल देता है, यानी रुपया जब बहुत तेजी से गिरता है तो डॉलर बेचता है और जब बहुत तेजी से बढ़ता है तो डॉलर खरीदता है, ताकि मार्केट में स्थिरता बनी रहे। 2025 में RBI ने $49.5 बिलियन का नेट एफएक्स रिजर्व बेचा, जो दिखाता है कि RBI रुपये को स्थिर रखने को तरजीह दे रहा है, न कि उसे बहुत ज्यादा मजबूत होने देने को।
जनवरी 2025 से ही इंडियन रुपये पर दबाव बना हुआ है, जिसका एक बड़ा कारण ट्रेड को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालना रहा है। पिछले साल अगस्त 2025 में अमेरिकी टैरिफ (Tariff) के कारण आई बड़ी गिरावट को रोकने के लिए RBI को $5 बिलियन का ऑपरेशन करना पड़ा था।
ग्लोबल फोकस और भविष्य का अनुमान
फिलहाल, विदेशी निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर्स जैसे ग्लोबल मैक्रो थीम्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी (Emerging Market Currencies) पर कम फोकस है। वहीं, रुपये का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) 2014 के बाद सबसे निचले स्तर पर है, जो बताता है कि यह अपनी वैल्यू से नीचे है। लेकिन इसके बावजूद यह अपने साथियों से पिछड़ रहा है।
भविष्य की बात करें तो, रुपया के लिए अनुमान अलग-अलग हैं। कुछ एनालिस्ट आने वाले हफ्तों में इसे 88.5-89 के स्तर पर वापस आते देख रहे हैं। वहीं, HSBC का अनुमान है कि 2026 के अंत तक USD/INR 90 के स्तर पर रहेगा। MUFG का अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह 89.50 और चौथी तिमाही तक 93.00 तक जा सकता है। ING जहां 2026 के अंत तक 87.00 का लक्ष्य देख रहा है, वहीं Bank of America का अनुमान 86/USD है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स (Trading Economics) का अनुमान है कि मौजूदा तिमाही के अंत तक रुपया 91.44 और 12 महीने में 90.22 रहेगा।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी, जिसमें महंगाई को कंट्रोल करना, ग्रोथ को सपोर्ट देना और एक्सचेंज रेट को स्टेबल रखना शामिल है, रुपये की चाल तय करेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अपने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को बढ़ाने के लिए 90 के स्तर से नीचे जाने पर किसी भी स्तर पर इंटरवेन्शन (Intervention) कर सकता है।