मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **95.33** पर खुला। डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये को सहारा दिया है। सऊदी अरब द्वारा एशिया के लिए तेल की कीमतों में कटौती के फैसले से देश के आयात बिल को कुछ राहत मिल सकती है।
तेल की कीमतों में कटौती का असर
सऊदी अरब ने एशिया को भेजे जाने वाले अपने तेल की कीमतों में $1.10 प्रति बैरल की बड़ी कटौती की है। यह पिछले दो दशकों में सबसे बड़ी कटौती में से एक है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में कमी से ऊर्जा खरीद के लिए डॉलर के बहिर्वाह में कमी आती है, जिससे देश के चालू खाते के घाटे (current account deficit) को प्रबंधित करने में मदद मिलती है।
रुपये में आई मजबूती, आगे क्या?
मंगलवार को रुपया 95.33 के स्तर पर खुला, जो पिछले दिन के 95.40 के मुकाबले मजबूती दर्शाता है। यह हालिया रुझान का हिस्सा है जहां कई एशियाई मुद्राओं में भी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखी गई है। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 101 के स्तर से नीचे आ गया है, जिससे रुपये जैसी क्षेत्रीय मुद्राओं को तकनीकी सहारा मिला है।
बाजार का अनुमान
हालांकि आज रुपये की शुरुआत सकारात्मक रही है, लेकिन हाल के सत्रों में इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि आज रुपया 95.20 से 95.70 के बीच कारोबार कर सकता है। आने वाले हफ्तों में रुपये की मजबूती वैश्विक महंगाई के रुझानों और डॉलर इंडेक्स की स्थिरता पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिका से महंगाई के आंकड़े नरम होते हैं, तो डॉलर पर और दबाव पड़ सकता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं को फायदा हो सकता है।
निवेशकों और व्यवसायों के लिए, मुद्रा में ये उतार-चढ़ाव सीधे आयात की लागत और निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करते हैं। आयातकों को अक्सर रुपये में मजबूती आने पर भुगतान दायित्वों को कवर करने के अवसर मिलते हैं, जबकि निर्यातक अपने डॉलर की कमाई को कब परिवर्तित करें, यह तय करने के लिए इन स्तरों की निगरानी करते हैं। इस रिकवरी की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वैश्विक तेल की कीमतें इन निचले स्तरों पर बनी रहती हैं और क्या डॉलर इंडेक्स अपनी वर्तमान गिरावट की गति को बनाए रखता है।
