बुधवार को भारतीय रुपये में **16 पैसे** की तेज़ी देखी गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **95.66** पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा दिन है जब रुपये में मजबूती आई है। मजबूत घरेलू शेयर बाज़ार, विदेशी निवेशकों के इनफ्लो और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी अपडेट से पहले डॉलर में आई नरमी इस तेज़ी के मुख्य कारण रहे।
रुपये में लगातार चौथे दिन तेज़ी
बुधवार को भारतीय रुपये ने अपनी मज़बूती का सिलसिला जारी रखते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे की बढ़त हासिल की। इसी के साथ रुपया 95.66 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा सत्र रहा जब घरेलू करेंसी में मजबूती दर्ज की गई है। घरेलू विकास के संकेत और वैश्विक वित्तीय स्थितियों में आए बदलावों ने इस तेज़ी को बल दिया है।
बाजार को किसने दी रफ्तार?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) से हुए ताज़ा निवेश ने भारतीय रुपये को सहारा दिया है। बाज़ार के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने इक्विटीज़ में ₹755.33 करोड़ का नेट निवेश किया, जो घरेलू बाज़ारों में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। रुपया आज 95.70 पर खुला और दिन के कारोबार में 95.48 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, मगर आखिर में 95.66 पर बंद हुआ।
घरेलू कारकों के अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर आगामी निर्णयों के मद्देनज़र वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में कुछ नरमी देखी गई। आमतौर पर, डॉलर के कमजोर होने से रुपये जैसी उभरती बाज़ारों की करेंसीज़ पर दबाव कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, हाल के घरेलू आर्थिक आंकड़े भी सकारात्मक रहे हैं। जून में भारत के औद्योगिक उत्पादन (Industrial Output) की वृद्धि दर बढ़कर 7.3% हो गई, जो मई में 5.1% थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग में आई रिकवरी और यूटिलिटी सेवाओं की स्थिर वृद्धि से प्रेरित थी।
कच्चे तेल की कीमतों का दबाव
जहां एक ओर रुपये में मजबूती आई है, वहीं निवेशकों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों की अस्थिरता पर भी ध्यान देना चाहिए। भारत के इंपोर्ट बिल के लिए एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) के फ्यूचर आज 3.78% बढ़कर USD 87.27 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे थे। यह बढ़ोतरी भू-राजनीतिक तनावों की खबरों के बाद हुई है, जिससे घरेलू तेल आयातकों द्वारा डॉलर की मांग बढ़ने की आशंका है और यह रुपये पर दबाव डाल सकती है।
इक्विटी बाज़ार का प्रदर्शन
आर्थिक और पूंजी प्रवाह के रुझानों पर घरेलू सूचकांकों (Indices) ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। BSE सेंसेक्स 888.68 अंक या 1.16% की महत्वपूर्ण बढ़त के साथ 77,654.60 पर बंद हुआ। इसी तरह, निफ्टी 50 में 264.85 अंक या 1.10% का उछाल आया और यह 24,250.20 पर पहुंच गया। इन बेंचमार्क का प्रदर्शन रुपये के लिए एक महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बना रहेगा, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों से उत्पन्न होने वाले संभावित ट्रेड-संबंधित दबावों को दूर करने के लिए इक्विटी इनफ्लो का निरंतर बने रहना आवश्यक है।
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख और घरेलू मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों पर नज़र बनाए रख सकते हैं, क्योंकि ये आने वाले सत्रों में विदेशी पूंजी प्रवाह की दिशा और करेंसी की अस्थिरता को निर्धारित करने की संभावना है।
