आज भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **6 पैसे** कमजोर होकर **₹96.31** पर खुला। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता जिओ-पॉलिटिकल तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। घरेलू शेयर बाजार भले ही तेजी में खुले हों, लेकिन तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बनाए रखा है।
मिडिल ईस्ट का टेंशन और रुपये पर असर
गुरुवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर खुला और ₹96.31 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल खतरों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस इलाके में चल रहे संघर्ष और बढ़ी हुई सैन्य गतिविधियों की खबरें मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा रही हैं, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव आ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बड़ा खेल
रुपये को कमजोर करने वाला एक बड़ा फैक्टर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय इक्विटी में ₹735.83 करोड़ की नेट बिकवाली की। विदेशी निवेशकों के लगातार पैसा निकालने से फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपये की मांग कम हो रही है, जिससे डॉलर के मुकाबले इसके मूल्य पर लगातार दबाव बना हुआ है।
कच्चे तेल और डॉलर इंडेक्स की चाल
बाहरी कारक, खासकर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा इम्पोर्टर है, और वैश्विक कीमतें बढ़ने से सीधे तौर पर देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ जाता है। इसके लिए अधिक डॉलर की ज़रूरत पड़ती है, जो रुपये पर और दबाव डालता है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कुछ अस्थिरता दिखी और यह करीब USD 84.69 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, लेकिन किसी भी तेज उछाल का घरेलू करेंसी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक को ट्रैक करता है, 100.49 पर स्थिर रहा, जिससे रुपये की रिकवरी की गुंजाइश सीमित हो गई।
शेयर बाजार में थोड़ी मजबूती
करेंसी पर दबाव के बावजूद, भारतीय शेयर बाजारों में शुरुआती मजबूती के संकेत दिखे। BSE Sensex 185.77 अंक बढ़कर 77,400.40 पर खुला, जबकि NSE Nifty इंडेक्स 42.15 अंक चढ़कर 24,132.60 पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव के समय अक्सर इक्विटी और करेंसी बाजार अलग-अलग दिशाओं में चलते हैं, क्योंकि निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर जैसी संपत्तियों में पैसा लगाने के लिए शेयरों से मुनाफा वसूल सकते हैं। शेयर बाजार की सकारात्मक शुरुआत और रुपये की गिरावट के बीच का यह अंतर, इक्विटी निवेशकों की तुलना में करेंसी ट्रेडरों के बीच मौजूदा सतर्क सेंटिमेंट को दर्शाता है।
निवेशक शायद मिडिल ईस्ट की स्थिति पर अपडेट पर नज़र रखेंगे, क्योंकि किसी भी तरह के बड़े घटनाक्रम से कच्चे तेल की कीमतें और निवेशकों का रिस्क लेने का इरादा प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, आने वाले सत्रों में करेंसी की स्थिरता के लिए FIIs की दैनिक खरीद या बिकवाली की गतिविधि पर कड़ी नज़र रहेगी।
