रुपया गिरा: विदेश में पढ़ाई अब भारतीय परिवारों के लिए हुई दोगुनी महंगी!

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
रुपया गिरा: विदेश में पढ़ाई अब भारतीय परिवारों के लिए हुई दोगुनी महंगी!
Overview

भारतीय रुपये में आई तेज गिरावट की वजह से विदेश में पढ़ाई और महंगी हो गई है। मजबूरन, भारतीय परिवारों को एजुकेशन लोन (Education Loan) की रकम **100%** तक बढ़ानी पड़ रही है। हालांकि यूके (UK) लोन के लिए सबसे बड़ा डेस्टिनेशन (Destination) बना हुआ है, लेकिन जर्मनी (Germany) और आयरलैंड (Ireland) जैसे किफायती विकल्प भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अब छात्रों को बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (Return on Investment) के लिए उच्च शैक्षणिक योग्यता दिखानी होगी और मांग वाले कोर्स चुनने होंगे।

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डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, विदेश में शिक्षा का सपना हुआ महंगा

भारतीय रुपये में आई भारी गिरावट के चलते विदेश में पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए यह और भी महंगा साबित हो रहा है। विदेशी मुद्रा के मुकाबले रुपये के कमजोर पड़ने से एजुकेशन लोन (Education Loan) की जरूरतें बढ़ गई हैं, जिससे भारतीय परिवारों को अपनी वित्तीय योजनाओं पर फिर से विचार करना पड़ रहा है।

एजुकेशन लोन की मांग में भारी उछाल

पिछले चार सालों में रुपया डॉलर के मुकाबले 23% कमजोर हुआ है। मौजूदा समय में यह 96.81 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस करेंसी (Currency) के उतार-चढ़ाव का सीधा असर यह हुआ है कि अमेरिका (US) में एक साल की यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का खर्च बढ़कर करीब ₹36 लाख हो गया है, जबकि पिछले साल यह करीब ₹33 लाख था। हैरानी की बात यह है कि यह बढ़ोतरी ट्यूशन फीस (Tuition Fees) में इजाफे के बिना हुई है। नतीजतन, पिछले चार सालों में विदेश में पढ़ाई के लिए लिए जाने वाले औसत एजुकेशन लोन (Education Loan) में 50% से 100% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

खास तौर पर अमेरिका में शिक्षा के लिए लोन लेने वालों की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है। साल 2022 में जहां औसत लोन ₹35 लाख था, वहीं 2026 में यह बढ़कर ₹66 लाख तक पहुंच गया है। इसी तरह, यूके (UK) के लिए लोन 75% बढ़कर ₹35 लाख हो गया है। ऑस्ट्रेलिया (Australia), कनाडा (Canada) और जर्मनी (Germany) जैसे देशों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है।

पढ़ाई के लिए पसंदीदा देशों में बदलाव

कभी भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका और कनाडा सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन (Destination) हुआ करते थे, लेकिन अब वहां एजुकेशन लोन (Education Loan) के आवेदनों में कमी आई है। वर्तमान में, यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) एजुकेशन लोन (Education Loan) के लिए सबसे बड़ा डेस्टिनेशन (Destination) बन गया है। वहीं, छात्र तेजी से जर्मनी (Germany) और आयरलैंड (Ireland) जैसे सस्ते स्टडी लोकेशंस (Study Locations) की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे लागत-प्रभावशीलता (Cost-effectiveness), बदलते इमिग्रेशन नियम (Immigration Rules), कोर्स की अवधि और ट्यूशन फीस (Tuition Fees) जैसे कई कारक काम कर रहे हैं।

अकादमिक सफलता के लिए नए नियम

विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार विदेशी शिक्षा के अपने प्लान्स को मौजूदा आर्थिक हकीकत के अनुसार ढाल रहे हैं, बजाय इसके कि वे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का विचार ही छोड़ दें। हालांकि, अब यह सोचना कि विदेशी डिग्री (Foreign Degree) और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा (Post-study work visa) अपने आप ही अच्छे रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (Return on Investment) की गारंटी दे देंगे, यह सही नहीं है। मौजूदा माहौल उन छात्रों के लिए ज्यादा फायदेमंद है जो उच्च शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और जिनकी कोर्स के बाद नौकरी की अच्छी संभावनाएं हैं। यानी, ग्रेजुएशन (Graduation) के बाद गलती की गुंजाइश बहुत कम रह गई है।

करेंसी का असर और बाजार के रुझान

यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि करेंसी (Currency) के उतार-चढ़ाव का एजुकेशनल इन्वेस्टमेंट (Educational Investment) पर कितना गहरा असर पड़ता है। लोन के बढ़ते आकार से पता चलता है कि एजुकेशन लोन (Education Loan) की मांग पूरे सेक्टर में काफी ज्यादा है। डेस्टिनेशन (Destination) की बदलती प्राथमिकताएं यह भी संकेत देती हैं कि छात्र उन देशों की ओर बढ़ रहे हैं जहां रुपये के मुकाबले एक्सचेंज रेट (Exchange Rate) ज्यादा स्थिर हैं या फिर ट्यूशन फीस (Tuition Fees) कम है।

उदाहरण के लिए, जर्मनी (Germany) में अक्सर अमेरिका (US) या यूके (UK) की तुलना में ट्यूशन फीस (Tuition Fees) काफी कम होती है। लेकिन लोन की रकम में हुई बढ़ोतरी यह दिखाती है कि इन सस्ते विकल्पों पर भी करेंसी (Currency) से जुड़े लागत में इजाफे का असर पड़ रहा है। छात्रों के लिए लंबे समय में रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (Return on Investment) काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वे ऊंची शुरुआती लागतों की भरपाई के लिए कितनी अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां हासिल कर पाते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.