मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **6 पैसे** कमजोर होकर **96.42** पर आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने रुपये पर दबाव बनाया है। इसी बीच, विदेशी निवेशकों द्वारा **₹1,100 करोड़** से अधिक के शेयरों की शुद्ध बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार में भी नरमी का रुख देखा गया।
Detailed Coverage
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक जोखिमों का असर
मंगलवार, 21 जुलाई 2026 की शुरुआती ट्रेडिंग में भारतीय रुपये पर दबाव देखा गया, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 96.42 के स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के दौर में अक्सर अमेरिकी डॉलर को एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखा जाता है।
रुपये पर मुख्य दबाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आया है। आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, विशेष रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष और हौथी-सऊदी लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्रों में, ने तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऊंची कीमतें आमतौर पर इन आयातों का भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा की मांग को बढ़ाती हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है।
इसी बीच, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 100.97 पर कारोबार कर रहा था। यह वैश्विक रुझान को दर्शाता है कि जब भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं तो पूंजी स्थिर संपत्तियों की ओर बढ़ती है, जिसका असर भारतीय रुपये सहित कई उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ता है।
शेयर बाजार और विदेशी निवेश का हाल
घरेलू शेयर बाजारों में भी यही सतर्कता का माहौल दिखाई दिया। बीएसई सेंसेक्स 58.89 अंक गिरकर 77,649.63 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 में 22.45 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,216.05 पर खुला। घरेलू शेयरों के इस कमजोर प्रदर्शन के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का हालिया रवैया भी चिंताजनक है। सोमवार के एक्सचेंज डेटा से पता चला कि विदेशी निवेशकों ने ₹1,121.04 करोड़ के भारतीय शेयर बेचकर शुद्ध बिकवाली की। ऐसे नकदी बहिर्वाह (outflows) अक्सर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, क्योंकि ये निवेशक स्थानीय संपत्तियों को बेचते हैं और प्राप्तियों को विदेशी मुद्राओं में बदलते हैं।
निवेशक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों की चाल और भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी खबरों पर नजर रखना जारी रखेंगे, क्योंकि ये मुद्रा की अस्थिरता के प्राथमिक चालक बने रहेंगे। इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थागत निवेशकों के प्रवाह की निरंतरता एक महत्वपूर्ण कारक होगी, क्योंकि शेयर बाजार में लगातार बिकवाली आने वाले सत्रों में रुपये के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकती है।
