गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया **4 पैसे** गिरकर **96.57** के स्तर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाया। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित दखलंदाजी से कुछ सहारा मिल रहा है, लेकिन विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी में बिकवाली जारी रहने से रुपया दबाव में है।
Detailed Coverage
क्यों गिरी भारतीय रुपया?
गुरुवार को भारतीय रुपये में गिरावट दर्ज की गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 96.57 पर बंद हुआ। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल ऑयल मार्केट में आई अस्थिरता रही, जहां ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2.21% बढ़कर $96.15 प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग मार्गों को लेकर चिंताएं, एनर्जी की कीमतों को बढ़ा रही हैं, जिसने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
कच्चे तेल का रुपये पर असर
भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक देश है। ऐसे में, जब कच्चे तेल की ग्लोबल कीमतें बढ़ती हैं, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अधिक अमेरिकी डॉलर की जरूरत पड़ती है। इस बढ़ी हुई मांग के कारण रुपये में कमजोरी आती है, क्योंकि आयातकों को तेल की समान मात्रा के लिए अधिक विदेशी मुद्रा चुकानी पड़ती है। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि इस ट्रेंड के साथ-साथ घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोरी ने भी रुपये को रक्षात्मक स्थिति में रखा है। दिन के दौरान, रुपया 96.45 और 96.59 के बीच कारोबार करता रहा, जो ग्लोबल ऑयल की खबरों और घरेलू इक्विटी प्रदर्शन दोनों के प्रति बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
इक्विटी मार्केट और निवेशक सेंटिमेंट
रुपये की कमजोरी के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। BSE सेंसेक्स 363.66 अंक गिरकर 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 इंडेक्स 126.65 अंक घटकर 23,869.60 पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा बुधवार को ₹819.20 करोड़ की बिकवाली के आंकड़ों ने सेंटिमेंट को और प्रभावित किया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, क्योंकि वे अपनी स्थानीय मुद्रा होल्डिंग्स को डॉलर में बदलते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भूमिका
फिलहाल बाजार की ताकतें रुपये को नीचे खींच रही हैं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करेंसी मार्केट में एक अहम खिलाड़ी बना हुआ है। केंद्रीय बैंक अक्सर अत्यधिक अस्थिरता को रोकने और तेज गिरावट से बचाने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार से अमेरिकी डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करता है। निवेशक आने वाले दिनों में रुपये की दिशा निर्धारित करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार पर आगामी डेटा और RBI की भविष्य की टिप्पणियों पर नजर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिरता पर अपडेट और डॉलर इंडेक्स में कोई भी बदलाव (जो मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक की ताकत को मापता है) महत्वपूर्ण होंगे।
