गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹5 मजबूत हुआ। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा करेंसी में स्थिरता लाने के प्रयासों से यह मजबूती आई है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बनाए हुए है।
Detailed Coverage
RBI की दखल से मिली राहत
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया (Indian Rupee) थोड़ा संभला और डॉलर के मुकाबले ₹96.48 के स्तर पर पहुँच गया। पिछले दिन यह ₹96.53 पर बंद हुआ था। बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा संकेत मिला है कि सरकारी बैंकों ने डॉलर को ₹96.50 के आसपास बेचना शुरू कर दिया है, जो अक्सर डॉलर के मुकाबले रुपये को और गिरने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक की कार्रवाई का संकेत होता है।
कच्चे तेल के बढ़ते दामों का असर
जहां RBI के हस्तक्षेप से रुपये को थोड़ी राहत मिली है, वहीं बाहरी कारक भारतीय मुद्रा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) का भाव बढ़कर $96.20 प्रति बैरल हो गया है, जो 2.26% की बढ़ोतरी दर्शाता है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक देश है, इसलिए ऊंची कीमतें तेल आयात के लिए अमेरिकी डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से रुपया कमजोर होता है। विश्लेषक इन तेल कीमतों पर कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि इन स्तरों के आसपास या ऊपर बने रहने से भारत के आयात बिल और करेंसी की स्थिरता पर लगातार दबाव पड़ सकता है।
FII की बिकवाली और शेयर बाजार में कमजोरी
घरेलू शेयर बाजारों में जारी कमजोरी के कारण निवेशकों का सेंटिमेंट अभी भी सतर्क बना हुआ है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 230.95 अंक गिरकर 76,521.02 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 में 57.15 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,937 पर पहुँच गया। बाजार में यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली से भी प्रभावित है। हालिया एक्सचेंज डेटा के अनुसार, FIIs ने बुधवार को ₹819.20 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचकर अपना पैसा देश से बाहर ले जाते हैं, तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे करेंसी पर नीचे की ओर दबाव बढ़ता है।
ट्रेडिंग का अनुमान
हालांकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) में कुछ कमजोरी देखी गई है, जो आमतौर पर अन्य मुद्राओं के लिए मददगार होती है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk) और पूंजी के बहिर्वाह (Capital Outflows) के मिले-जुले असर से रुपये की चाल अनिश्चित बनी हुई है। करेंसी विश्लेषकों का अनुमान है कि सत्र के दौरान रुपया 96.50 से 96.65 के दायरे में उतार-चढ़ाव दिखा सकता है। बाजार की मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि क्या RBI करेंसी की रक्षा के लिए बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखता है, या तेल की कीमतों और विदेशी बिकवाली का दबाव सपोर्ट लेवल 96.10 या उससे नीचे के स्तरों का परीक्षण कराता है। निवेशकों को आने वाले सत्रों में FII की गतिविधि में बदलाव और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर किसी भी नए अपडेट पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये निकट भविष्य में करेंसी की चाल के प्रमुख कारक होंगे।
