आज हफ्ते की शुरुआत में भारतीय रुपये में मजबूती देखी गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया **20 पैसे** चढ़कर **94.25** पर खुला, जो पिछले कारोबारी दिन **94.45** पर बंद हुआ था। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी फंड के इनफ्लो (inflow) से रुपये को सहारा मिला है।
क्या हुआ?
भारतीय रुपया (Indian Rupee) सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर ₹94.25 के स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी दिन यह ₹94.45 पर बंद हुआ था। यह मजबूती ऐसे समय में आई है जब घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को मुहर्रम की छुट्टी के कारण बंद थे।
रुपये की इस मजबूती के पीछे मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार किए जा रहे निवेश को माना जा रहा है।
तेल की कीमतों का असर
भारत के लिए कच्चा तेल एक बड़ा आयात (Import) है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत को उसी मात्रा में तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। इसके विपरीत, तेल की कीमतों में गिरावट से आयात बिल कम होता है और डॉलर की मांग घट जाती है, जिससे रुपये को प्राकृतिक रूप से सहारा मिलता है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) वायदा $72.51 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीदों के कारण पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में 10% से अधिक की गिरावट आई है। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भारत के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।
फॉरेक्स रिजर्व और RBI का बफर
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में भी मजबूती दिख रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 19 जून को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 963 मिलियन डॉलर बढ़कर 672.587 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले हफ्ते 9.985 बिलियन डॉलर की बड़ी गिरावट के बाद एक महत्वपूर्ण रिकवरी है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि RBI फॉरेक्स मार्केट में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए अक्सर हस्तक्षेप करता है। रिजर्व में लगातार वृद्धि से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर बेचने की हालिया अवधि के बाद अपने बफर को फिर से बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
मजबूत डॉलर का दबाव
हालांकि, रुपये को मजबूत डॉलर से भी चुनौती मिल रही है। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index), जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, वर्तमान में 13 महीने के उच्च स्तर के करीब है और हाल ही में 101.37 पर कारोबार कर रहा था।
जब डॉलर वैश्विक स्तर पर मजबूत होता है, तो उभरते बाजारों की मुद्राएं, जैसे कि रुपया, अक्सर कमजोर दबाव में आ जाती हैं। निवेशक इस समय सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, वे कम तेल कीमतों के लाभ और अमेरिकी मुद्रा की लगातार मजबूती के बीच संतुलन बना रहे हैं।
आगे क्या देखें?
आगे चलकर, रुपये के लिए मुख्य निगरानी बिंदु विदेशी फंड प्रवाह की निरंतरता और वैश्विक तेल की कीमतों की स्थिरता होगी। यदि ब्रेंट क्रूड में गिरावट का ट्रेंड जारी रहता है, तो यह रुपये को राहत प्रदान कर सकता है। हालांकि, निवेशक RBI की मुद्रा अस्थिरता पर टिप्पणी और डॉलर इंडेक्स में किसी भी बदलाव पर भी नजर रखेंगे, जो भारतीय मुद्रा के अगले बड़े कदम को निर्धारित कर सकता है।
