डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95.35 पर मजबूत, FPI इनफ्लो का दिखा असर

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95.35 पर मजबूत, FPI इनफ्लो का दिखा असर

शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया **15 पैसे** मजबूत होकर **₹95.35** पर बंद हुआ। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के लगातार इनफ्लो ने रुपये को सहारा दिया है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह मजबूती सीमित रही।

विदेशी निवेश से रुपये को मिली बढ़त

भारतीय रुपये ने शुक्रवार को मजबूती दर्ज की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.35 पर कारोबार समाप्त किया। यह घरेलू मुद्रा के लिए लगातार पांचवें सत्र में बढ़त का संकेत है, जिसने दिन के दौरान 15 पैसे का Appreciation दिखाया। रुपये की यह हालिया मजबूती भावना में सुधार को दर्शाती है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सक्रिय समर्थन और पूंजी प्रवाह में बदलाव से बल मिला है।

FPI ने किया भारी निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी मार्केट में पिछले तीन ट्रेडिंग दिनों में लगभग ₹7,360 करोड़ का निवेश किया है, जिससे वे नेट खरीदार बन गए हैं। यह पिछले अवधियों के नेट सेलिंग के रुझान से एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिसने बाहरी दबावों के बावजूद रुपये की अस्थिरता को प्रबंधित करने में मदद की है। मार्केट एनालिस्ट इन इनफ्लो पर बारीकी से नजर रखते हैं, क्योंकि विदेशी निवेशकों की निरंतर रुचि घरेलू बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर रुपये पर दबाव कम करती है।

कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर

हालांकि इन इनफ्लो ने रुपये को सहारा दिया है, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक कारकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें USD 89.40 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं। भारत, जो कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है, के लिए वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि अक्सर तेल विपणन कंपनियों द्वारा डॉलर की मांग को बढ़ाती है, जो प्रभावी रूप से रुपये की मजबूती को सीमित कर सकती है।

ऊर्जा लागत के अलावा, पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान की संभावना या बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति में व्यापक वृद्धि निवेशकों को अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर पूंजी स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जो रुपये जैसी उभरती बाजार मुद्राओं को अस्थायी रूप से कमजोर कर सकती है।

बाजार का रुख

घरेलू इक्विटी इंडेक्स ने मुद्रा की चाल के साथ-साथ लचीलापन दिखाया। सेंसेक्स 166.49 अंक बढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 66.45 अंक चढ़कर 24,383.60 पर रहा। निवेशक आगे यह देखेंगे कि विदेशी इक्विटी इनफ्लो का रुझान कितना सुसंगत रहता है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें विकसित हो रही भू-राजनीतिक स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया करती हैं। निकट अवधि में USD-INR जोड़ी ₹95.00 से ₹95.60 के दायरे में रहने की उम्मीद है, जो इन अंतर्निहित वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.