भारतीय रुपये ने पिछले छह हफ्तों में सबसे बड़ी एकदिनी मजबूती दर्ज की है, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह **95.89** पर बंद हुआ। ग्लोबल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में **6.6%** की भारी गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है। हालांकि, साल-दर-साल (Year-to-date) रुपया अभी भी **6.3%** कमजोर है, जिसका मुख्य कारण पहले के भू-राजनीतिक तनाव रहे हैं।
Detailed Coverage
तेल सस्ता होने का बड़ा असर:
सोमवार को भारतीय रुपया 0.70% की जोरदार मजबूती के साथ 95.89 प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। यह इस मुद्रा के लिए लगभग छह हफ्तों में सबसे अच्छा एकदिनी प्रदर्शन था, जिसने थाईलैंड की बहत और ताइवान डॉलर जैसी कई एशियाई मुद्राओं को भी पीछे छोड़ दिया। इस रिकवरी का मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आई 6.6% की भारी गिरावट रही, जिससे यह $86.3 प्रति बैरल के आसपास आ गया।
आयात बिल पर दबाव कम:
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी एक महत्वपूर्ण कारक है। चूंकि भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कम कीमतों से कुल आयात बिल को कम करने और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिलती है। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति में बाधा की चिंताओं से जो दबाव रुपये पर था, वह इस विकास से काफी हद तक कम हुआ है। इसके अलावा, घरेलू डेट इंस्ट्रूमेंट्स में विदेशी पूंजी के लगातार इनफ्लो (inflow) और FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़े डॉलर की सप्लाई ने भी बाजार की सेंटिमेंट (sentiment) को बेहतर बनाया है।
RBI का दखल और बॉन्ड यील्ड:
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करता देखा गया है। इस कदम का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को फिर से बनाना है। इन बाजार परिस्थितियों का असर डेट मार्केट पर भी पड़ा, जहां बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 6.77% पर बंद हुआ। यह पिछले सत्र की तुलना में 5-बेसिस पॉइंट की गिरावट को दर्शाता है। चालू फाइनेंशियल ईयर (2026-27) में, बेंचमार्क यील्ड 26 बेसिस पॉइंट नरम हुआ है।
आगे क्या?
हालांकि सोमवार को रुपये ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन साल-दर-साल (Year-to-date) परिदृश्य पर नजर डालें तो यह अभी भी 6.3% कमजोर है। इस गिरावट का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 5.1%, ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष के बढ़ने के बाद आया था। वर्तमान रैली डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में नरमी और बेहतर रिस्क एपेटाइट (risk appetite) से प्रेरित है, लेकिन रुपये का भविष्य कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों की स्थिरता, विदेशी इनफ्लो की निरंतरता और RBI के हस्तक्षेप की सीमा पर बारीकी से नजर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, आयातकों से संभावित महीने के अंत की डॉलर डिमांड भी एक ऐसा फैक्टर है जो निकट अवधि में रुपये की इनগুলোর को बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
