रुपया हुआ मजबूत! RBI के दखल से डॉलर के मुकाबले 96.55 पर बंद

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AuthorNeha Patil|Published at:
रुपया हुआ मजबूत! RBI के दखल से डॉलर के मुकाबले 96.55 पर बंद

भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **18 पैसे** मजबूत होकर **96.55** पर बंद हुआ। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दखल को इस मजबूती का मुख्य कारण माना जा रहा है। यह मजबूती मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव के बावजूद आई है, जिसका असर घरेलू शेयर बाजारों पर भी दिख रहा है।

Detailed Coverage

RBI के दखल से रुपये में आई मजबूती

शुक्रवार को भारतीय रुपये में रिकवरी देखने को मिली और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.55 के स्तर पर बंद हुआ। पिछले दिन के 96.73 के मुकाबले यह 18 पैसे की मजबूती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह स्थिरता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा की गई सक्रिय दखलंदाजी का नतीजा है। RBI ने पब्लिक सेक्टर बैंकों के जरिए डॉलर बेचकर करेंसी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव को काबू करने की कोशिश की है।

वैश्विक तेल कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों का असर

पूरे हफ्ते रुपया भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण दबाव में रहा। मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य हमलों और लाल सागर में समुद्री तेल परिवहन में बाधाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था, जो कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, के लिए ऊंची कीमतें ऊर्जा आयात के भुगतान के लिए डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से रुपये पर दबाव पड़ता है।

शेयर बाजार और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां

घरेलू शेयर बाजारों में भी सतर्कता का माहौल दिखा, जहां लगातार पांचवें कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। BSE सेंसेक्स 331.62 अंक गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 102.15 अंक गिरकर 23,767.45 पर आ गया। इस गिरावट का एक कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी रही, जिन्होंने गुरुवार को ₹2,999.23 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचते हैं और अपना पैसा देश से बाहर ले जाते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे बाजार में रुपये की आपूर्ति बढ़ती है और मुद्रा में गिरावट आती है।

आगे का अनुमान और निगरानी वाले कारक

आगे चलकर, रुपये की चाल संभवतः वैश्विक तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक संघर्षों की तीव्रता से जुड़ी रहेगी। विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से रुपये को एक सहारा मिल सकता है, जिससे USD-INR स्पॉट प्राइस 96.30 से 96.85 की सीमा में रह सकता है। हालांकि, यह काफी हद तक बाहरी घटनाओं पर निर्भर करेगा। निवेशक अगले हफ्ते रुपये की स्थिरता का आकलन करने के लिए कच्चे तेल की भविष्य की कीमतों के रुझान और विदेशी पोर्टफोलियो के बहिर्वाह की गति में किसी भी बदलाव पर बारीकी से नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.