USD/INR: RBI की दखल से ₹96.28 पर रुपया मजबूत, पर इन वजहों से बना दबाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
USD/INR: RBI की दखल से ₹96.28 पर रुपया मजबूत, पर इन वजहों से बना दबाव

भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **14 पैसे** मजबूत होकर **96.28** पर बंद हुआ। चार दिनों की गिरावट के बाद यह रिकवरी आई है, और इसके पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की दखलंदाजी को मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है।

क्या है ₹96.28 की रिकवरी की कहानी?

शुक्रवार को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे की बढ़त दर्ज की और 96.28 के स्तर पर बंद हुआ। यह रिकवरी पिछले चार दिनों से लगातार जारी गिरावट के बाद आई है। गुरुवार को रुपया 96.42 के निचले स्तर पर चला गया था। बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से की गई सक्रिय दखलंदाजी (Intervention) ने रुपये को सहारा दिया है। केंद्रीय बैंक अक्सर बाजार में अस्थिरता को कम करने और रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए ऐसे कदम उठाता है।

कच्चे तेल का बढ़ता दाम बना सिरदर्द

रुपये में मामूली सुधार के बावजूद, भारतीय मुद्रा पर दबाव अभी भी काफी ज्यादा है। पश्चिमी एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल 1.60% बढ़कर $85.58 प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात (Import) करता है, इसलिए कच्चे तेल के महंगे होने से डॉलर की मांग बढ़ती है, जो सीधे तौर पर रुपये पर दबाव डालती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

मार्केट के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजारों से लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रुपये की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। गुरुवार को FIIs ने भारतीय इक्विटी में ₹4,205.56 करोड़ की भारी बिकवाली की थी। जब विदेशी निवेशक शेयर बेचकर पैसा वापस अपनी करेंसी में बदलते हैं, तो घरेलू मुद्रा का मूल्य अक्सर गिरता है। विदेशी फंड के लगातार बाहर जाने और एनर्जी आयात की ऊंची लागत का यह कॉम्बिनेशन, अल्पावधि (Short Term) में रुपये के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल बना रहा है।

आगे क्या देखें?

आने वाले दिनों में रुपये का भविष्य कई बाहरी फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। निवेशक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि किसी भी बड़ी बढ़ोतरी से भुगतान संतुलन (Balance of Payments) पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, विदेशी फंड के फ्लो की दिशा (Direction) भी करेंसी और इक्विटी मार्केट, दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर बनी हुई है। हालांकि केंद्रीय बैंक अत्यधिक अस्थिरता के दौरान सपोर्ट देना जारी रख सकता है, लेकिन फिलहाल व्यापक रुझान ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट से प्रभावित है। उम्मीद है कि रुपया 96.00 से 96.55 के दायरे में ट्रेड करेगा। डॉलर इंडेक्स भी प्रमुख ग्लोबल मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती का एक अहम पैमाना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.