सशक्त हुआ रुपया! $20.72 अरब के इनफ्लो से डॉलर के मुकाबले 96.24 पर पहुंचा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
सशक्त हुआ रुपया! $20.72 अरब के इनफ्लो से डॉलर के मुकाबले 96.24 पर पहुंचा

भारतीय रुपये में मजबूती का रुख है। डॉलर के मुकाबले रुपया **12 पैसे** चढ़कर **96.24** पर बंद हुआ। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्वैप फैसिलिटी के जरिए जून से अब तक **$20.72 अरब** का फॉरेन एक्सचेंज इनफ्लो हुआ है, जिसने बाजार की अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच लिक्विडिटी को स्थिर रखने में मदद की है।

Detailed Coverage

कैसे मजबूत हुआ रुपया?

मंगलवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय रुपये ने रिकवरी दिखाई। डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे बढ़कर 96.24 के स्तर पर बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के दौरान करेंसी 96.41 पर खुली और 96.13 से 96.42 के बीच रही। यह पिछले दिन के 6 पैसे की गिरावट से एक महत्वपूर्ण बदलाव था।

इनफ्लो का बड़ा सहारा

रुपये की इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के खास लिक्विडिटी उपायों से जुड़ा कैपिटल इनफ्लो (Capital Inflow) बड़ा सहारा बना। 8 जून को स्वैप फैसिलिटी (Swap Facility) शुरू होने के बाद से देश में कुल $20.72 अरब का फॉरेन एक्सचेंज इनफ्लो हुआ है। इस इनफ्लो ने डोमेस्टिक करेंसी (Domestic Currency) को सहारा दिया है, जिसे ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainties) और डोमेस्टिक इक्विटी मार्केट (Domestic Equity Market) में बदलते सेंटिमेंट का दबाव झेलना पड़ रहा था।

FCNR डिपॉजिट्स का अहम योगदान

फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स इस इनफ्लो के प्रमुख स्रोत रहे हैं। 17 जुलाई तक इन्होंने कुल इनफ्लो में $17.406 अरब का योगदान दिया। इसके अलावा, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (OFCBs) के जरिए $1.97 अरब और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECBs) के जरिए $1.342 अरब की राशि भी आकर्षित हुई है। ये कैपिटल फ्लो देश के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) को मजबूत करने और RBI को करेंसी की अस्थिरता को मैनेज करने के लिए अधिक लचीलापन देने में महत्वपूर्ण हैं।

बाजार की चुनौतियां बरकरार

जहां इनफ्लो से सहारा मिला है, वहीं व्यापक बाजार का माहौल अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। डोमेस्टिक इक्विटी मार्केट में सेंसेक्स 238.41 अंक गिरकर 77,470.11 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50.80 अंक की गिरावट के साथ 24,187.70 पर आ गया। एक्सचेंज डेटा से पता चलता है कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) भारतीय इक्विटी के नेट सेलर्स थे, जिन्होंने सोमवार को ₹1,121.04 करोड़ के शेयर बेचे।

कच्चे तेल का असर और भू-राजनीतिक जोखिम

एक्सटर्नल फैक्टर्स (External Factors) भी करेंसी की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में मामूली 0.03% की गिरावट आई और यह 100.91 पर स्थिर हुआ। हालांकि, एनर्जी कॉस्ट (Energy Cost) रुपये के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है, क्योंकि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent Crude Futures) 0.25% चढ़कर $89.44 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और हौथी समूह द्वारा सप्लाई चेन में बाधाएं, तेल आपूर्ति के लिए लगातार जोखिम पैदा कर रही हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि से आमतौर पर भारत के लिए आयात लागत बढ़ जाती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

आगे क्या?

आगे चलकर, निवेशक और मार्केट पार्टिसिपेंट्स इन फॉरेक्स इनफ्लो की स्थिरता पर नजर रखेंगे। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि RBI एनर्जी प्राइस वोलेटिलिटी (Energy Price Volatility) के कारण होने वाले महंगाई के दबाव के मुकाबले लिक्विडिटी मैनेजमेंट को कैसे संतुलित करता है। ग्लोबल ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारतीय इक्विटी में FIIs की गतिविधि का ट्रेंड, रुपये के भविष्य की चाल के लिए मुख्य कारक बने रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.