आज की सुबह भारतीय रुपया (INR) के लिए काफी अच्छी रही। डॉलर के मुकाबले इसमें 38 पैसे की मजबूत रिकवरी देखी गई, जिससे यह ₹90.40 के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले दिन की गिरावट को पलटते हुए दिखा, जब रुपया ₹90.78 पर बंद हुआ था। यह मजबूती किसी बाहरी फैक्टर से नहीं, बल्कि डोमेस्टिक मार्केट के इंटरनल डायनामिक्स से आई।
डोमेस्टिक सपोर्ट ने बढ़ाई मजबूती
रुपये की इस तेजी के पीछे की सबसे बड़ी वजहें भारतीय बैंकिंग सिस्टम में मौजूद भरपूर लिक्विडिटी और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का लगातार निवेश रहा। पिछले दिन FIIs ने भारतीय इक्विटीज में करीब ₹943.81 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि यह बहुत बड़ा फ्लो नहीं था, पर इसने डॉलर बेचने और रुपये को सपोर्ट करने का काम किया। सबसे अहम बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मनी मार्केट को स्ट्रेस-फ्री रखने के लिए लिक्विडिटी को ₹3 लाख करोड़ के करीब बनाए रखा है, जो पिछले छह महीनों का उच्चतम स्तर है। इस भारी कैश की उपलब्धता ने रुपये को स्थिर या मजबूत बनाने का माहौल तैयार किया।
ग्लोबल मार्केट से मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से रुपये पर कोई बड़ा दबाव नहीं आया। एशियाई करेंसीज (Asian Currencies) का हाल मिश्रित रहा, खासकर अमेरिकी जॉब्स डेटा पर मिली-जुली प्रतिक्रिया के चलते। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) 96.78 पर हल्का नीचे रहा, जिससे रुपये पर भारी गिरावट का खतरा कम रहा। इस शांत ग्लोबल परफॉरमेंस की वजह से डोमेस्टिक फैक्टर्स ही रुपये की दिशा तय करते रहे।
साथियों के मुकाबले परफॉरमेंस
आज के दिन, जब रुपया मजबूत हो रहा था, दूसरी बड़ी एशियाई करेंसीज (Asian Currencies) का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जापानी येन (Japanese Yen) डॉलर के मुकाबले हल्का कमजोर हुआ, वहीं साउथ कोरियन वॉन (South Korean Won) लगभग स्थिर रहा। सिंगापुर डॉलर (Singapore Dollar) में थोड़ी बढ़त देखी गई। कुल मिलाकर, रुपये की 38 पैसे की यह इंट्राडे रिकवरी खास रही, और यह उन करेंसीज से बेहतर प्रदर्शन कर गया जो या तो स्थिर थीं या थोड़ी कमजोर पड़ीं।
पिछला अनुभव और सबक
अगर हम पिछले साल फरवरी 2025 को देखें, तो भारतीय रुपये ने भी कुछ ऐसी ही डोमेस्टिक लिक्विडिटी ऑपरेशन्स के चलते स्थिरता दिखाई थी। हालांकि, उस समय भी करेंसी ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेस और इंटरनेशनल रिस्क सेंटिमेंट में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रही थी। आज की डोमेस्टिक मजबूती उसी पुराने पैटर्न की याद दिलाती है, लेकिन स्ट्रक्चरल जोखिम अभी भी बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।
खतरे की घंटी: एक्सटर्नल रिस्क
दिन की यह मजबूती अपनी जगह है, लेकिन रुपये के लिए आगे का रास्ता अभी भी मुश्किलों भरा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें, जो करीब $69.69 प्रति बैरल पर बनी हुई हैं, भारत के इम्पोर्ट बिल पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रही भू-राजनीतिक टेंशन (Geopolitical Tensions) भी एक रिस्क-एवरसे माहौल बना रही हैं, जो इमर्जिंग मार्केट करेंसीज जैसे रुपये के लिए ठीक नहीं है। इसके अलावा, अमेरिका-भारत व्यापारिक संबंधों को लेकर अनिश्चितता, खासकर संभावित टैरिफ एडजस्टमेंट की खबरें, एक और चिंता बढ़ाती हैं। इम्पोर्टर्स और कॉर्पोरेशन्स की डॉलर की मांग भी लगातार बनी हुई है, जो साफ दिखाता है कि अंदरूनी दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
भविष्य का अनुमान
एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि 2026 की पहली छमाही में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 90 से 93 के दायरे में ट्रेड कर सकता है। RBI की लिक्विडिटी मैनेजमेंट स्थिरता दे सकती है, लेकिन महंगाई (Inflation) और देश के एक्सटर्नल डेट ऑब्लिगेशन्स (External Debt Obligations) की चिंताएं बनी रहेंगी। अगर ग्लोबल रिस्क बढ़ता है या कमोडिटी प्राइसेस में बड़ा उछाल आता है, तो रुपया और कमजोर हो सकता है। इसलिए, करेंसी का परफॉरमेंस RBI के रुख और ग्लोबल डेवलपमेंट पर निर्भर करेगा।