भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **14 पैसे** मजबूत होकर **95.33** पर बंद हुआ। वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से इसे सहारा मिला। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
क्यों आई रुपये में मजबूती?
शुक्रवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय रुपये की क्लोजिंग 95.33 पर हुई, जो कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे की मजबूती दिखाता है। इस रिकवरी के पीछे दो बड़े ग्लोबल कारण रहे: पहला, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का कमजोर होना और दूसरा, इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो यह भारतीय रुपये के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा की मांग कम हो जाती है।
बाज़ार में कैसा रहा रुपया?
कारोबार की शुरुआत में रुपया 95.27 पर खुला था। दिनभर के दौरान यह 95.22 और 95.42 के बीच रहा और अंत में अपनी दिन की ऊपरी क्लोजिंग के करीब बंद हुआ। वहीं, छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.04% की गिरावट के साथ 100.86 पर ट्रेड कर रहा था, जिसने रुपये जैसी उभरती हुई मुद्राओं को कुछ राहत दी।
किन चुनौतियों से जूझ रहा है रुपया?
सकारात्मक क्लोजिंग के बावजूद, करेंसी मार्केट अभी भी कई मुश्किलों से जूझ रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे अनिश्चितता का माहौल है और यह अक्सर अस्थिरता पैदा करता है। इसके अलावा, भारतीय इक्विटी मार्केट्स में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार बिकवाली देखी जा रही है, जो लोकल करेंसी पर और दबाव डाल रही है। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, FIIs ने पिछले सत्र में ₹532.86 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे। यह एक ऐसा ट्रेंड है जिस पर निवेशक अक्सर बारीकी से नजर रखते हैं, क्योंकि इससे डोमेस्टिक मार्केट में डॉलर के प्रवाह में कमी आती है।
शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती
इस बीच, डोमेस्टिक स्टॉक मार्केट्स ने रुपये में उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूती दिखाई। सेंसेक्स 1.08% चढ़कर 77,569.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1.02% बढ़कर 24,206.90 पर पहुंच गया। शेयरों में यह सकारात्मक प्रदर्शन संभवतः दिन के दौरान रुपये की गिरावट को सीमित करने में मददगार रहा। ब्रेंट क्रूड, जो वैश्विक तेल बेंचमार्क है, बाजार बंद होने के समय 0.62% की गिरावट के साथ USD 75.83 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
आगे क्या?
आने वाले समय में, रुपये की स्थिरता काफी हद तक डोमेस्टिक इक्विटी फ्लो और ग्लोबल एक्सटर्नल प्रेशर के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि आने वाले हफ्तों में भारतीय शेयरों में विदेशी बिकवाली जारी रहती है या नहीं, और पश्चिम एशिया की स्थिति के जवाब में तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में कैसे उतार-चढ़ाव आता है।
