रुपया ₹95.38 पर पहुंचा साप्ताहिक ऊंचाई पर; RBI के दखल से मिली मजबूती

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AuthorNeha Patil|Published at:
रुपया ₹95.38 पर पहुंचा साप्ताहिक ऊंचाई पर; RBI के दखल से मिली मजबूती

भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.38 पर बंद हुआ, जो मार्च के बाद से इसकी सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त है। ग्लोबल ऑयल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, RBI के मार्गदर्शन में सरकारी बैंकों द्वारा की गई डॉलर की बिक्री ने करेंसी को रिकवर करने में मदद की। निवेशक अब केंद्रीय बैंक की करेंसी स्थिरता की रणनीति का आकलन करने के लिए आगामी विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं।

रुपये की शानदार साप्ताहिक बढ़त

भारतीय रुपया इस हफ्ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.38 पर बंद हुआ, जो मार्च के बाद इसकी सबसे मजबूत साप्ताहिक क्लोजिंग रही। पिछले पांच ट्रेडिंग दिनों में करेंसी में करीब 1% का सुधार देखा गया है। हालांकि, ग्लोबल एनर्जी मार्केट की अस्थिरता के कारण, रुपये में मासिक आधार पर लगभग 0.7% की गिरावट दर्ज की गई है।

कच्चे तेल का बढ़ता बोझ

रुपये का मौजूदा रुख ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों से जुड़ा हुआ है, जो इस महीने काफी बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत में इस महीने लगभग 21% का उछाल आया है, जबकि WTI क्रूड 18% तक बढ़ा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ऊंची कीमतों से डॉलर की मांग बढ़ती है, जो रुपये पर दबाव डालती है। इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (आयातित महंगाई) की संभावना अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि ईंधन की बढ़ती लागत खुदरा और थोक मूल्य सूचकांकों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की रणनीति

मार्केट के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रहा है ताकि करेंसी को रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से रोका जा सके। यह देखा गया है कि जब लिक्विडिटी कम होती है, तो सरकारी बैंकों ने डॉलर बेचे हैं। इस टैक्टिकल अप्रोच का मकसद विदेशी मुद्रा भंडार को अत्यधिक कम किए बिना अस्थिरता को मैनेज करना है। हालांकि RBI हस्तक्षेप की राशि का खुलासा नहीं करता है, लेकिन USD/INR की चाल में इन बिक्रियों का असर साफ दिखता है।

व्यापक आर्थिक परिदृश्य

हफ्ते के आखिर में ग्लोबल ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने जैसे बाहरी कारकों ने भी रुपये को सहारा दिया। इन रुझानों और अन्य एशियाई केंद्रीय बैंकों के समान हस्तक्षेप प्रयासों ने उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए एक सहायक माहौल बनाया।

घरेलू स्तर पर, इक्विटी बाजारों में मिलाजुला प्रदर्शन देखने को मिला है, जिसमें निफ्टी आईटी इंडेक्स ने इस महीने 16% की बढ़त हासिल की, जबकि निफ्टी 50 में 2% का इजाफा हुआ। हालांकि रुपये की हालिया रिकवरी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी स्थिरता ग्लोबल ऑयल की कीमतों और केंद्रीय बैंक के भंडार प्रबंधन के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। निवेशक 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह के भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों और RBI की जून के अंत की फॉरवर्ड बुक के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करेंगे ताकि हस्तक्षेप के पैमाने और देश की बाहरी बैलेंस शीट के वर्तमान स्वास्थ्य को समझा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.