डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट की बड़ी वजहें
यह गिरावट सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $95 के पार पहुँचने से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) और बढ़ गया है। भारत बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए जब तेल महंगा होता है तो डॉलर का भंडार तेजी से घटता है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।
इस स्थिति को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने और गंभीर बना दिया है। FIIs ने हाल ही में एक ही दिन में ₹3,900 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है। ऐसे में, निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे भारतीय बाजारों से पैसा निकल रहा है।
बाजार की चाल और निवेशकों का भरोसा
आम तौर पर, रुपया कच्चे तेल की कीमतों के साथ चलता है, लेकिन इस बार हालात अलग दिख रहे हैं। मौजूदा गिरावट को देखकर लगता है कि बाजार का भरोसा डगमगा गया है। शेयर बाजार में Sensex और Nifty में आई भारी गिरावट से संकेत मिलता है कि निवेशक कमाई से ज्यादा लिक्विडिटी (Liquidity) पर ध्यान दे रहे हैं।
भले ही GST कलेक्शन और इंडस्ट्रियल आउटपुट के आंकड़े अच्छे आ रहे हों, लेकिन बाजार अभी इन पर ध्यान नहीं दे रहा। निवेशक फिलहाल डॉलर के मुकाबले अपनी लागत को सुरक्षित करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में, अगर RBI अपनी अगली पॉलिसी मीटिंग में सख्त रुख नहीं अपनाता है, तो रुपये की गिरावट बढ़ सकती है।
रुपये पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा
रुपये के लिए सबसे बड़ा खतरा आयातित महंगाई (Imported Inflation) और RBI की दखलअंदाजी से विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का कम होना है। अगर RBI ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता है, तो रुपया 95.30 के स्तर को तोड़ सकता है।
जानकारों का मानना है कि RBI की कोशिशों के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है और यह वैश्विक सेंटीमेंट के खिलाफ एक स्थायी बचाव नहीं दे पा रहा है। FIIs की लगातार बिकवाली से यह भी साफ है कि उन्हें निकट भविष्य में शेयर बाजार से ज्यादा उम्मीद नहीं है।
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स की नजरें अब USDINR के 95.30 के लेवल पर टिकी हैं। 5 जून को होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। जब तक कच्चा तेल $90 के नीचे नहीं आता, तब तक रुपये पर दबाव बने रहने की उम्मीद है। ऐसे में, विदेशी पूंजी के बहिर्वाह को रोकने के लिए RBI की रणनीति पर सबकी निगाहें रहेंगी।
