रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: कच्चे तेल में उछाल और FII की बिकवाली का दोहरा झटका

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: कच्चे तेल में उछाल और FII की बिकवाली का दोहरा झटका
Overview

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **95.19** के नए निचले स्तर पर आ गया है। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। ऐसे में, बाजार की नजरें अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगले कदम पर टिकी हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट की बड़ी वजहें

यह गिरावट सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $95 के पार पहुँचने से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) और बढ़ गया है। भारत बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए जब तेल महंगा होता है तो डॉलर का भंडार तेजी से घटता है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।

इस स्थिति को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने और गंभीर बना दिया है। FIIs ने हाल ही में एक ही दिन में ₹3,900 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है। ऐसे में, निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे भारतीय बाजारों से पैसा निकल रहा है।

बाजार की चाल और निवेशकों का भरोसा

आम तौर पर, रुपया कच्चे तेल की कीमतों के साथ चलता है, लेकिन इस बार हालात अलग दिख रहे हैं। मौजूदा गिरावट को देखकर लगता है कि बाजार का भरोसा डगमगा गया है। शेयर बाजार में Sensex और Nifty में आई भारी गिरावट से संकेत मिलता है कि निवेशक कमाई से ज्यादा लिक्विडिटी (Liquidity) पर ध्यान दे रहे हैं।

भले ही GST कलेक्शन और इंडस्ट्रियल आउटपुट के आंकड़े अच्छे आ रहे हों, लेकिन बाजार अभी इन पर ध्यान नहीं दे रहा। निवेशक फिलहाल डॉलर के मुकाबले अपनी लागत को सुरक्षित करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में, अगर RBI अपनी अगली पॉलिसी मीटिंग में सख्त रुख नहीं अपनाता है, तो रुपये की गिरावट बढ़ सकती है।

रुपये पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

रुपये के लिए सबसे बड़ा खतरा आयातित महंगाई (Imported Inflation) और RBI की दखलअंदाजी से विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का कम होना है। अगर RBI ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता है, तो रुपया 95.30 के स्तर को तोड़ सकता है।

जानकारों का मानना है कि RBI की कोशिशों के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है और यह वैश्विक सेंटीमेंट के खिलाफ एक स्थायी बचाव नहीं दे पा रहा है। FIIs की लगातार बिकवाली से यह भी साफ है कि उन्हें निकट भविष्य में शेयर बाजार से ज्यादा उम्मीद नहीं है।

आगे क्या?

एक्सपर्ट्स की नजरें अब USDINR के 95.30 के लेवल पर टिकी हैं। 5 जून को होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। जब तक कच्चा तेल $90 के नीचे नहीं आता, तब तक रुपये पर दबाव बने रहने की उम्मीद है। ऐसे में, विदेशी पूंजी के बहिर्वाह को रोकने के लिए RBI की रणनीति पर सबकी निगाहें रहेंगी।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.