भारतीय रुपया रिकॉर्ड स्तर पर गिरा: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, $1 डॉलर के मुकाबले 83.57 पर पहुंचा

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
भारतीय रुपया रिकॉर्ड स्तर पर गिरा: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, $1 डॉलर के मुकाबले 83.57 पर पहुंचा

बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **83.57** के स्तर पर आ गया, जो पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भारतीय करेंसी पर दबाव बनाया है।

Detailed Coverage

क्यों गिरी भारतीय रुपया?

अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जो पिछले छह हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई में रुकावट की आशंका जताई जा रही है। इससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $93.50 से $95.50 प्रति बैरल के बीच चल रही हैं, जो 3% से 5% तक की तेज़ी दर्शाती है।

भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में, तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, क्योंकि तेल कंपनियों को भुगतान के लिए ज़्यादा डॉलर खरीदने पड़ते हैं। इस ज़रूरत ने रुपए पर नीचे की ओर दबाव डाला है।

RBI का दखल

बाज़ार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए, सरकारी बैंकों ने बुधवार को बाज़ार में अमेरिकी डॉलर बेचे। विश्लेषकों का मानना है कि ये कदम भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निर्देश पर उठाए गए हैं। आमतौर पर, RBI किसी खास स्तर को तय करने के बजाय करेंसी की गिरावट की गति को नियंत्रित करने के लिए ऐसे कदम उठाता है। इन हस्तक्षेपों के बावजूद, अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते रुपया दबाव में रहा।

वैश्विक बाज़ार का असर

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर मज़बूत बना हुआ है। इसकी वजह सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड का ऊंचा होना है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को लेकर भी बाज़ार में अनिश्चितता है। निवेशकों को जुलाई में दरों में कटौती की उम्मीद कम है, और अब उनका ध्यान सितंबर की नीतिगत बदलावों पर है। अमेरिका और अन्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों का यह अंतर ग्रीनबैक को सहारा दे रहा है, जिससे रुपया, येन और युआन जैसी करेंसी के लिए मज़बूत होना मुश्किल हो रहा है।

आगे चलकर, रुपए की चाल कच्चे तेल की कीमतों की स्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव की अवधि पर निर्भर करेगी। ट्रेडर फॉरवर्ड प्रीमियम पर भी नज़र रखे हुए हैं। निवेशकों के लिए मुख्य चिंता का विषय RBI का लिक्विडिटी और करेंसी प्रबंधन को लेकर कोई नया कदम उठाना या बयान देना होगा, साथ ही वैश्विक तेल सप्लाई की स्थिति पर भी नज़र रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.