भारतीय रुपया ₹95.86 पर मजबूत, $3.8 अरब के इनफ्लो और तेल कीमतों में गिरावट का असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारतीय रुपया ₹95.86 पर मजबूत, $3.8 अरब के इनफ्लो और तेल कीमतों में गिरावट का असर

पिछले हफ्ते भारतीय रुपया **95.86** के स्तर पर मजबूत हुआ। जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो इनफ्लो (FPI) में **$3.8 अरब** की वृद्धि और कच्चे तेल की कीमतों में **13%** की गिरावट ने इसे सहारा दिया। अब निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत फैसले पर नजरें टिकाए हुए हैं, जो डॉलर के मुकाबले रुपये की दिशा तय करेगा।

Detailed Coverage

विदेशी निवेश और सस्ते तेल का डबल बूस्टर

भारतीय रुपया पिछले हफ्ते 0.4% की मजबूती के साथ 95.86 पर बंद हुआ। इस मजबूती का मुख्य कारण विदेशी निवेश में जोरदार उछाल और सस्ता कच्चा तेल रहा। जुलाई महीने में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार में $3.8 अरब का पैसा लगाया है। अकेले पिछले हफ्ते ही $665 मिलियन का नेट इनफ्लो देखने को मिला।

सस्ता हुआ कच्चा तेल, कैसे मिला रुपये को सहारा?

रुपये को मजबूती देने में एक बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में आई 13% की बड़ी गिरावट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $85 प्रति बैरल के करीब आ गया है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में से एक है, और तेल की कीमतों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जब तेल सस्ता होता है, तो आयात बिल भरने के लिए भारत को कम विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। इससे डॉलर की मांग कम होती है और रुपये को मजबूती मिलती है। हाल में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सप्लाई चेन बाधित होने का डर भी कम हुआ है, जिससे कीमतों में यह गिरावट आई है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी निगाहें

घरेलू मोर्चे पर भले ही हालात सुधर रहे हों, लेकिन अब पूरा फोकस इस बुधवार को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अहम पॉलिसी मीटिंग पर है। हालांकि, उम्मीद यही है कि ब्याज दरें स्थिर रहेंगी, लेकिन फेड के कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। निवेशक ब्याज दरों के भविष्य के रुख के बारे में संकेत तलाश रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऊंची अमेरिकी दरें अक्सर उभरते बाजारों से पूंजी को बाहर खींच लेती हैं, जिससे रुपये पर दबाव बन सकता है।

टेक्निकल चार्ट्स क्या कहते हैं?

टेक्निकल चार्ट्स के अनुसार, रुपया 95.80 के स्तर पर एक मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) का सामना कर रहा है, जो उसके 21-दिन के मूविंग एवरेज के करीब है। अगर रुपया इस बाधा को पार कर लेता है, तो यह 95.40 और 95.00 जैसे मजबूत स्तरों की ओर बढ़ सकता है। वहीं, अगर यह इस रेजिस्टेंस को पार करने में नाकाम रहता है, तो यह वापस 96.20 या 96.60 के सपोर्ट स्तरों की ओर फिसल सकता है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का प्रदर्शन, जो फिलहाल 101.60 और 101.80 के बीच रेजिस्टेंस जोन का परीक्षण कर रहा है, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। मजबूत डॉलर इंडेक्स रुपये की और बढ़त को सीमित कर सकता है, जबकि इंडेक्स में गिरावट रुपये को और मजबूत होने का मौका दे सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.