भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर नई चिंताएं और तेल का झटका: IT स्टॉक्स धड़ाम
गुरुवार को शेयर बाजार में बिकवाली का माहौल हावी रहा। इसका मुख्य कारण भारत-अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) के नए डिटेल्स को लेकर बढ़ी अनिश्चितता और जांच थी, जिसने निवेशकों को सतर्क कर दिया। हालिया खुलासों ने डील के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए हैं, जिससे बाजार सेंटिमेंट (Market Sentiment) कमजोर हुआ। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में जारी उछाल ने भी चिंताएं बढ़ाई हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब $69.69 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जिससे आयात पर निर्भर भारत की अर्थव्यवस्था पर महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) का दबाव बढ़ने की आशंका है।
इसी पृष्ठभूमि में, घरेलू इक्विटी मार्केट (Equity Market) पर बिकवाली का दबाव बढ़ा। बेंचमार्क BSE सेंसेक्स 421.66 अंक यानी 0.50% की गिरावट के साथ 83,811.98 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 121.10 अंक यानी 0.47% गिरकर 25,832.75 पर आ गया। इस गिरावट में सबसे ज्यादा मार टेक्नोलॉजी सेक्टर को झेलनी पड़ी। Infosys और Tata Consultancy Services (TCS) जैसे दिग्गज IT शेयरों में भारी गिरावट आई।
Infosys के शेयर 3.59% गिरकर करीब ₹1,472.4 पर आ गए, वहीं TCS 4.16% लुढ़ककर करीब ₹2,909.00 पर ट्रेड कर रहे थे। दोनों कंपनियों के शेयर अपने 52-हफ्ते के नए लो (Low) पर पहुंच गए, Infosys ₹1,407.9 और TCS ₹2,780 पर। Nifty IT इंडेक्स सेक्टरों में सबसे ज्यादा लगभग 5% नीचे गिरा। IT शेयरों में यह भारी गिरावट, जो अमेरिका से बड़ा रेवेन्यू (Revenue) कमाते हैं, ग्लोबल टेक्नोलॉजी काउंटर्स (Global Technology Counters) में आई कमजोरी और मजबूत अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) में कटौती की उम्मीदें कम होने से भी जुड़ी है।
वहीं, दूसरी ओर, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 38 पैसे मजबूत होकर 90.40 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का थोड़ा-बहुत इनफ्लो और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा करेंसी को स्टेबल रखने के लिए किए गए संभावित इंटरवेंशन (Intervention) से आई। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) भी 0.05% गिरकर 96.78 पर था।
जानकार मान रहे हैं कि रुपये का मजबूत होना एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों, खासकर IT सेक्टर के लिए एक अतिरिक्त दबाव बना सकता है, क्योंकि उनके प्रोडक्ट्स विदेशी खरीदारों के लिए महंगे हो जाएंगे। Infosys, जिसका ट्रेलिंग बारह महीने का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 21.32 है, अपने इंडस्ट्री एवरेज P/E 25.34 से नीचे ट्रेड कर रहा है। TCS का P/E रेश्यो करीब 21.5 है। विश्लेषकों के अनुसार, IT कंपनियों को मार्जिन प्रेशर (Margin Pressure) और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रुपया वोलेटाइल (Volatile) रहा है, जो फरवरी 2026 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 92.02 के स्तर तक गिर गया था। ऐसे में, मौजूदा मजबूती एक सस्टेन्ड ट्रेंड (Sustained Trend) के बजाय एक टेम्परेरी रिलीफ (Temporary Relief) हो सकती है।