भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **48 पैसे** मजबूत हुआ। सऊदी अरब द्वारा कच्चे तेल की कीमतों में कटौती के फैसले ने इस मजबूती को बल दिया, जिससे भारत के लिए महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद है।
रुपये में आई जोरदार रिकवरी
मंगलवार को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शानदार वापसी की। दिन के कारोबार के अंत में रुपया 94.95 के स्तर पर बंद हुआ, जो सोमवार के 95.43 के स्तर से 48 पैसे की बढ़त दर्शाता है। यह मजबूती वैश्विक आर्थिक हालातों में आ रहे बदलावों का सीधा असर है, जिसका भारत के आयात बिल और महंगाई पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर
इस करेंसी मूवमेंट का एक मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी है। सऊदी अरब ने हाल ही में एशिया के लिए अपने अगस्त महीने के कच्चे तेल की सप्लाई में प्रति बैरल $11 की कटौती का ऐलान किया है। चूंकि भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी से विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह (outflow) को कम करने में मदद मिलती है। तेल आयात के भुगतान के लिए डॉलर की मांग में यह कमी आम तौर पर रुपये को सहारा देती है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 1.19% बढ़कर $72.85 प्रति बैरल हो गईं, लेकिन बाजार की नजरें आपूर्ति-पक्ष में सुधार पर बनी हुई हैं।
वैश्विक कारक और बाजार का रुख
तेल के अलावा, अमेरिकी सेवाओं के क्षेत्र से मिले निराशाजनक आंकड़ों के कारण कमजोर हुए डॉलर ने भी रुपये को फायदा पहुंचाया। डॉलर इंडेक्स, जो प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, 100.96 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि इन कारकों से तत्काल राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इंपोर्टर्स की हेजिंग (importar hedging) के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है। कंपनियां अक्सर कीमत की अस्थिरता से बचाव के लिए डॉलर पहले से खरीद लेती हैं।
घरेलू बाजार का परिदृश्य
मुद्रा में रिकवरी के बावजूद, घरेलू शेयर बाजार सतर्क बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 104.35 अंक गिरकर 78,180.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 31.65 अंकों की गिरावट आई और यह 24,398.70 पर पहुंच गया। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले कारोबारी दिन ₹243.03 करोड़ की इक्विटी खरीद के साथ बाजार में रुचि दिखाई, लेकिन फिलहाल शेयर बाजार की भावना करेंसी के प्रदर्शन से अलग दिख रही है। निवेशक अब आगामी अमेरिकी रोजगार परिवर्तन डेटा (US employment change data) पर नजर रखेंगे, जिससे आने वाले दिनों में डॉलर की मजबूती और परिणामस्वरूप रुपये की स्थिरता के बारे में और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
