RBI का दखल और रुपये को मिली थोड़ी राहत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को स्थिर करने के लिए अहम कदम उठाया है। RBI ने बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को $100 मिलियन तक सीमित कर दिया है, जिससे रुपये में शुरुआती मजबूती देखी गई और यह 92.85 प्रति अमेरिकी डॉलर (USD) के स्तर पर पहुंच गया। इस कदम का मकसद रुपये की अस्थिरता को कम करना और आयातकों व सरकार को थोड़ी राहत देना है।
वैश्विक चिंताओं का बाज़ार पर असर
हालांकि, रुपये को मिली यह राहत अस्थायी साबित हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार बिकवाली, अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (खासकर ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर) ने बाज़ार की धारणा को प्रभावित किया। इसके चलते, भारतीय शेयर बाज़ार, जिसमें BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी50 शामिल हैं, गिरावट के साथ खुले।
शेयरों में बिकवाली, FIIs ने निकाला पैसा
सोमवार को BSE सेंसेक्स 509.77 अंक गिरकर 72,822.60 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी50 141.20 अंक टूटकर 22,571.90 पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाज़ारों से ₹9,931.13 करोड़ की भारी बिकवाली की थी। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹7,208.41 करोड़ की खरीदारी की, पर यह FIIs की बिकवाली को संभालने के लिए काफी नहीं था। बाज़ार में बढ़ती घबराहट और अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया VIX अभी भी 26 के ऊपर बना हुआ है।
तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ती अशांति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $109 प्रति बैरल के पार निकल गया है। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी देश के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) में लगभग $15 बिलियन की बढ़ोतरी हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।
रुपये की कमजोरी और डॉलर का दबदबा
पिछले एक महीने में रुपया 1.47% और पिछले 12 महीनों में 7.99% कमजोर हुआ है। मार्च 2026 में यह 92.37 के निचले स्तर पर चला गया था। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) भी 100.17 के आसपास मजबूत बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण सुरक्षित निवेश की मांग और अमेरिकी रोज़गार के मज़बूत आंकड़े हैं। डॉलर की यह मजबूती उभरते बाज़ारों की मुद्राओं पर दबाव डाल रही है।
बाज़ार की आगे की चाल
विश्लेषकों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बाज़ार की चाल निर्भर करेगी। कुछ का मानना है कि निफ्टी में 22,450-22,500 के स्तर पर सपोर्ट दिख रहा है। वहीं, कुछ अन्य का कहना है कि घरेलू स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के मज़बूत फंडामेंट (जैसे मैन्युफैक्चरिंग में बढ़त) कुछ हद तक सहारा दे सकते हैं। 8 अप्रैल को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary Policy Review) पर भी बाज़ार की नज़रें रहेंगी।