Dollar के मुकाबले रुपया मजबूत, 96.41 पर खुला; RBI की दखलंदाजी से मिली राहत

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AuthorAditya Rao|Published at:
Dollar के मुकाबले रुपया मजबूत, 96.41 पर खुला; RBI की दखलंदाजी से मिली राहत

भारतीय रुपया आज, 21 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत खुला। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 4 पैसे की बढ़त के साथ 96.41 पर ट्रेड कर रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद रुपया अपनी मजबूती बनाए हुए है।

Detailed Coverage

रुपये में मामूली मजबूती, RBI की दखलंदाजी का असर

भारतीय रुपया 21 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी मजबूती के साथ खुला। यह पिछले दिन के 96.45 के बंद भाव से 4 पैसे की बढ़त के साथ 96.41 पर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच यह मजबूती भारतीय रुपये के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं।

RBI की सक्रिय भूमिका

बाजार की अटकलों पर लगाम लगाने और रुपये को गिरने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सक्रिय भूमिका निभा रहा है। RBI ऊंची कीमतों पर डॉलर बेचकर रुपये को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) जमाओं के बढ़ते प्रवाह को बनाए रखने में भी RBI की यह पहल सहायक है। आयातकों और तेल कंपनियों से डॉलर की मांग बनी हुई है, लेकिन RBI की निरंतर उपस्थिति इसे एक बड़े झटके से बचा रही है।

एशियाई और वैश्विक मुद्राओं का हाल

21 जुलाई को एशियाई मुद्राओं के बाजार में मिला-जुला रुख देखा गया। मलेशियाई रिंगित और चीनी युआन में मामूली बढ़त दर्ज की गई, वहीं अन्य क्षेत्रीय मुद्राओं पर बिकवाली का दबाव रहा। दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.26% से अधिक की गिरावट आई, जो क्षेत्र में सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बाथ का स्थान रहा।

वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगभग 100.96 पर स्थिर बना हुआ है, जो एक सप्ताह के उच्च स्तर के करीब है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से उत्पन्न ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान की चिंताओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इन दबावों के बावजूद, ब्रिटिश पाउंड और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं ने अपेक्षाकृत स्थिरता बनाए रखी है।

आगे बाजार की चाल

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़े लोगों के लिए वर्तमान परिदृश्य में सतर्कता बरतना महत्वपूर्ण है। निर्यातक अक्सर रुपये में अस्थिरता या बढ़त के दौरान डॉलर बेचकर लाभ कमाना चाहते हैं। वहीं, आयातक विदेशी मुद्रा भुगतान की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने और भविष्य में लागत वृद्धि के जोखिम को कम करने के लिए डॉलर में गिरावट का इंतजार करते हैं। आने वाले सत्रों में, RBI के हस्तक्षेप की रणनीति की प्रभावशीलता और वैश्विक तेल की कीमतों का उतार-चढ़ाव ही रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.