भारतीय रुपया हुआ मजबूत, डॉलर के मुकाबले पहुंचा 95.63 पर; शेयर बाजार में दिखी तेजी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारतीय रुपया हुआ मजबूत, डॉलर के मुकाबले पहुंचा 95.63 पर; शेयर बाजार में दिखी तेजी

भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे मजबूत होकर 95.63 पर खुला। विदेशी पूंजी प्रवाह और घरेलू शेयर बाजार में आई तेजी ने रुपये को सहारा दिया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।

रुपये में आई मजबूती की वजह?

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.63 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले दिन के 95.76 के मुकाबले 13 पैसे की मजबूती दर्शाता है। इससे पहले, पिछले दो कारोबारी सत्रों में रुपये में 74 पैसे की रिकवरी देखी गई थी।

क्यों मिला रुपये को सहारा?

घरेलू शेयर बाजार का सकारात्मक रुख रुपये के लिए मुख्य सहारा बना हुआ है। गुरुवार सुबह, BSE Sensex 44.77 अंक चढ़कर 77,699.37 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 21.65 अंक बढ़कर 24,270.20 पर कारोबार कर रहा था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी ने भी इस चाल को बल दिया। पिछले सत्र में FIIs ने ₹2,981.87 करोड़ के शेयर खरीदे थे। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में निवेश करते हैं, तो वे आमतौर पर विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलते हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा को समर्थन मिलता है।

वैश्विक कारक और डॉलर की चाल

घरेलू समर्थन के बावजूद, रुपये की बड़ी बढ़त को वैश्विक कारक रोक रहे हैं। यूएस डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख विश्व मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.06% बढ़कर 101.79 पर पहुंच गया। यह चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के हालिया फैसले से जुड़ी है। जब अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो डॉलर वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाता है, जो रुपये जैसी उभरती बाजार की मुद्राओं पर दबाव डाल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक जोखिम

निवेशक वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव पर भी नजर रख रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और मुद्रा स्थिरता पर पड़ता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 1.26% गिरकर USD 89.60 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। कीमतें पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं, खासकर अमेरिका और ईरान के ठिकानों पर हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद। भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव का स्थानीय बाजार में डॉलर की मांग पर असर पड़ता है, क्योंकि तेल कंपनियों को आयात का भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा खरीदनी पड़ती है। निवेशकों को विदेशी संस्थागत निवेश के रुझानों और तेल की कीमतों की चाल पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये निकट अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपये के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.