घरेलू शेयर बाजार में आई तेजी के दम पर शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **14 पैसे** मजबूत होकर **96.28** पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से इसकी मजबूत बढ़त पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
बाज़ार में आई तेज़ी का असर
शुक्रवार को भारतीय रुपये में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे चढ़कर 96.28 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह मजबूती घरेलू शेयर बाजारों में आई तेज़ी के कारण संभव हुई। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 480 अंकों से ज़्यादा और निफ्टी 125 अंक चढ़कर खुले। सकारात्मक घरेलू सेंटीमेंट अक्सर स्थानीय मुद्रा को सहारा देता है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।
बाहरी दबावों से सीमित हुई बढ़त
हालांकि घरेलू इक्विटी ने सपोर्ट दिया, लेकिन रुपये को महत्वपूर्ण बाहरी बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिसने एक मजबूत रैली को रोका। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे थे, और पिछली सत्र में उन्होंने ₹4,205.56 करोड़ की इक्विटी बेची थी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जो रुपये पर दबाव डालती है।
इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों का वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर असर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 0.39% बढ़कर $84.83 प्रति बैरल हो गई हैं। चूँकि भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, इसलिए उच्च वैश्विक कीमतें अक्सर आयात के भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ाती हैं, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है।
डॉलर की मजबूती और आगे का अनुमान
डॉलर इंडेक्स, जो प्रमुख विश्व मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की ताकत को मापता है, 100.78 के आसपास बना हुआ था, जिसमें 0.02% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। एक मजबूत डॉलर अन्य मुद्राओं को अपेक्षाकृत कमजोर बनाता है, जिससे रुपये की बढ़त बनाए रखने की क्षमता और चुनौती बन जाती है।
Finrex Treasury Advisors LLP के बाजार अवलोकन के अनुसार, दिन के बाकी कारोबार में रुपया 96.00 से 96.50 की सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है। एक मजबूत डॉलर और तेल की कीमतों में जारी अस्थिरता का संयोजन बताता है कि सुबह की बढ़त के बावजूद मुद्रा में गिरावट का पूर्वाग्रह हो सकता है। निवेशक विदेशी बिकवाली की तीव्रता और मध्य पूर्व से अपडेट की निगरानी करना जारी रखेंगे, क्योंकि ये कारक निकट अवधि में मुद्रा की अस्थिरता के प्राथमिक चालक बने हुए हैं।
