अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में डॉलर के कमजोर पड़ने और एशियाई मुद्राओं में आई तेज़ी के बीच, भारतीय रुपया (Indian Rupee) मंगलवार को मज़बूती के साथ खुला। लेकिन, इस तेज़ी पर घरेलू बाज़ारों से आई एक बड़ी डिमांड ने लगाम लगा दी।
यह मजबूती काफी हद तक चीनी युआन (Chinese Yuan) जैसी एशियाई मुद्राओं में आई तेज़ी को फॉलो कर रही थी। हालांकि, देश की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की तरफ से डॉलर की जबर्दस्त मांग (Dollar Demand) ने रुपये की चाल को धीमा कर दिया। इन कंपनियों को अपने इंपोर्ट बिल चुकाने और विदेशी मुद्रा में लिए गए लोन का भुगतान करने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की ज़रूरत थी। इसी वजह से, दिन के आखिर में रुपया पिछले दिन के 90.77 के स्तर से सुधरकर 90.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
अमेरिकी डॉलर की बात करें तो, यह भी ग्लोबल मार्केट में दबाव में दिखा। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) 97 के अहम स्तर के नीचे फिसलकर 96.84 पर आ गया। विश्लेषकों का मानना है कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों और अमेरिकी एसेट्स में विदेशी मांग घटने की चिंताओं ने डॉलर को कमजोर किया। इसके अलावा, चीनी नियामकों द्वारा वित्तीय संस्थानों को यूएस ट्रेज़री (US Treasuries) में अपनी हिस्सेदारी कम करने की सलाह ने भी ग्रीनबैक पर और दबाव बनाया, जिसका अप्रत्यक्ष फायदा रुपये को मिला।
फरवरी महीने में अब तक रुपया करीब 1.56% मज़बूत हो चुका है, लेकिन चालू फाइनेंशियल ईयर (FY26) में अब तक के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो यह करीब 5.04% कमजोर हुआ है। जानकारों का कहना है कि 90.00-90.20 प्रति डॉलर का ज़ोन रुपये के लिए इमीडिएट सपोर्ट का काम करेगा। यदि रुपया इस स्तर से नीचे जाता है, तो यह 91.00-91.20 की तरफ बढ़ सकता है। ऐसे में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप की उम्मीद है, जो डॉलर खरीदकर फॉरेन एक्सचेंज इनफ्लो को संभालने और रुपये की बहुत तेज़, अस्थिर बढ़त को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
दूसरी तरफ, गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) के अनुमान को भी संशोधित किया है। उन्होंने 2026 के लिए इसे जीडीपी (GDP) के 0.8% तक नीचे आने का अनुमान लगाया है, जिसका श्रेय यूएस टैरिफ एडजस्टमेंट के बाद दबाव कम होने को दिया गया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि रुपये पर दबाव भले ही कम हुआ है, लेकिन इसमें बहुत बड़ी और तेज़ बढ़त की गुंजाइश सीमित है। भारत-यूएस ट्रेड डील के बाद पोर्टफोलियो इनफ्लो (Portfolio Inflows) में तेज़ी आने पर, आरबीआई इसे फॉरवर्ड पोजीशन को अनवाइंड (unwind) करके और फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को बढ़ाकर संभालेगा। बता दें कि 30 जनवरी तक भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व रिकॉर्ड $723.77 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया था।