तेल की बढ़ती कीमतें और तनाव का डबल अटैक
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $104 प्रति बैरल (Brent Crude) के करीब पहुँच गई हैं, जिससे भारत का इम्पोर्ट बिल (import bill) बढ़ने की आशंका है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, ऐसे में कीमतों का बढ़ना सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता है। इसी के साथ, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स जैसे अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ा दी है। इन दोनों वजहों ने मिलकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी, खासकर रुपये पर भारी दबाव बनाया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालना भी है। बुधवार को ही FIIs ने इक्विटी (shares) में करीब ₹2,078.36 करोड़ की बिकवाली की। अप्रैल महीने में यह आंकड़ा ₹39,224.10 करोड़ के पार जा चुका है, जबकि मार्च में भी ₹1.22 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली देखी गई थी। इस पैसे की निकासी से भारतीय बाजार में डॉलर की आमद कम हो जाती है, जिससे रुपये की कमजोरी बढ़ती है। हालांकि, डोमेस्टिक संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी की है, लेकिन वह FIIs की बिकवाली की भरपाई नहीं कर पा रही है।
गहराता करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit)
विश्लेषकों का मानना है कि ऊंचे तेल आयात के कारण देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (देश का आयात, निर्यात से ज्यादा होना) और बढ़ सकता है। यह डेफिसिट GDP के 2.1% से बढ़कर 3.4% तक जा सकता है, जिससे देश पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि FY27 में यह डेफिसिट 2.1% रह सकता है, जो पहले के अनुमानों से काफी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में करेंसी पर लगातार दबाव बना रहता है। गोल्डमैन सैक्स ने भी 2025 के अंत तक डेफिसिट के 2.8% तक पहुंचने की बात कही थी।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में रुपये की चाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। मिराए एसेट शेयरखान के एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि नियर-टर्म में USD-INR स्पॉट प्राइस ₹93.80 और ₹94.50 के बीच रह सकता है। अगर तेल का दबाव कम होता है और RBI की तरफ से स्थिरता के उपाय किए जाते हैं, तो रुपया वापस 92-93 के स्तर पर लौट सकता है। हालांकि, अगर तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं और विदेशी निवेशक सतर्क रहते हैं, तो रुपया 94-95 के स्तर को फिर से छू सकता है। खुद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2026-27 के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये का अनुमान 94.00 लगाया है, जो बताता है कि आने वाले समय में भी दबाव बना रह सकता है।
