भारतीय रुपया हुआ मजबूत! डॉलर के मुकाबले ₹95.59 पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारतीय रुपया हुआ मजबूत! डॉलर के मुकाबले ₹95.59 पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट

भारतीय रुपया आज यानी 30 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार चौथे दिन मजबूत हुआ और **95.59** के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने रुपये को सहारा दिया।

रुपये में लगातार चौथे दिन मजबूती

भारतीय रुपया 30 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.59 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। पिछले बंद भाव 95.65 की तुलना में यह छह पैसे की मजबूती दर्शाता है। यह लगातार चौथा सत्र है जब रुपये में तेजी देखी गई है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला और क्रूड ऑयल की राहत

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के बीच अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। इससे वैश्विक बाजारों को कुछ राहत मिली, हालांकि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के तीन सदस्यों ने दरें बढ़ाने का समर्थन किया था। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स सितंबर की बैठक में 57% तक दर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।

ऊर्जा की कीमतों में नरमी से भी भारतीय मुद्रा को फायदा हुआ। ब्रेंट क्रूड ऑयल, जो पिछले सत्र में 8% उछला था, आज लगभग 1% गिरकर $89 प्रति बैरल पर आ गया। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, इसलिए कम कीमतें आयात के लिए विदेशी मुद्रा की मांग को कम करती हैं, जिससे रुपये को स्थिर करने में मदद मिलती है।

RBI का दखल और बाजार का नजरिया

घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने बाजार ऑपरेशंस के जरिए स्थिरता बनाए हुए है। बाजार सहभागियों ने देखा है कि केंद्रीय बैंक पिछले सप्ताह से लगातार डॉलर बेच रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य रुपये की विनिमय दर में तेज उतार-चढ़ाव को रोकना है। डॉलर बेचकर, RBI आयातित मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव से उत्पन्न अस्थिरता को प्रबंधित करने का प्रयास कर रहा है।

भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी निवेशकों के लिए एक प्रमुख कारक बने हुए हैं। मध्य पूर्व में मिसाइल और ड्रोन हमलों से संबंधित चल रहे संघर्ष, जिसमें मिस्र की ओर तनाव बढ़ने की खबरें शामिल हैं, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। हालांकि रुपये ने हाल के दिनों में मजबूती दिखाई है और कई अन्य एशियाई मुद्राओं से बेहतर प्रदर्शन किया है, इसकी चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ये वैश्विक संघर्ष कैसे विकसित होते हैं और RBI स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने डॉलर भंडार का प्रबंधन कैसे करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.