FPI नियमों में ढील का कमाल?
भारतीय रुपये में 95.24 के स्तर तक की मजबूती के पीछे RBI का विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी सिक्योरिटीज मार्केट में निवेश के नियमों को आसान बनाना है। इस कदम से उम्मीद है कि देश में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और रुपये को सहारा मिलेगा।
लेकिन, यह राहत भरी खबर ऐसे समय आई है जब देश की आर्थिक ग्रोथ धीमी पड़ रही है। RBI ने देश की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया है, जो पहले 6.9% रहने की उम्मीद थी।
महंगाई पर चिंता और ब्याज दरों का खेल
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जहां नीतिगत दरों पर न्यूट्रल रुख बनाए रखने की बात कही, वहीं महंगाई के आंकड़े एक अलग कहानी बयां कर रहे हैं। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। यह साफ इशारा है कि एनर्जी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते महंगाई का दबाव बढ़ने वाला है।
यहां एक विरोधाभास है: एक तरफ RBI विदेशी कर्ज से पूंजी आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के अंदर महंगाई को काबू में रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
शेयर बाजार और पूंजी प्रवाह में बड़ा अंतर
बाजार की प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि लिक्विडिटी (तरलता) का एक अजीब खेल चल रहा है। जहां रुपया मजबूत हुआ, वहीं घरेलू शेयर बाजार को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹4,447.06 करोड़ के शेयर बेच दिए।
यह दिखाता है कि भले ही FPIs RBI के नए नियमों के बाद भारतीय बॉन्ड में दिलचस्पी दिखा रहे हों, लेकिन वे घरेलू कंपनियों की कमाई और शेयर की वैल्यूएशन को लेकर अभी भी सतर्क हैं। Sensex और Nifty जैसे प्रमुख सूचकांकों में तेजी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। निवेशक इक्विटी की ग्रोथ पर दांव लगाने के बजाय सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं।
कमजोर बुनियाद और बाहरी दबाव
रुपये में आई अल्पकालिक मजबूती के बावजूद, फंडामेंटल (बुनियादी) outlook अभी भी बाहरी कारकों से प्रभावित है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का $95.37 प्रति बैरल तक पहुंचना चालू खाते के घाटे (current account deficit) पर दबाव बना रहा है, जिससे रुपये की बड़ी मजबूती की गुंजाइश कम हो जाती है।
इसके अलावा, व्यापार घाटे को पूरा करने के लिए विदेशी पूंजी पर निर्भरता रुपये को वैश्विक जोखिमों के प्रति और भी संवेदनशील बनाती है। डॉलर इंडेक्स 99.40 के करीब बना हुआ है, और अगर अमेरिकी यील्ड (yield) में कोई भी तेजी आती है, तो यह हालिया लाभ जल्दी ही खत्म हो सकता है। RBI ने भी साफ कर दिया है कि वह किसी खास एक्सचेंज रेट बैंड के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, जिससे रुपया अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह के उतार-चढ़ाव का शिकार हो सकता है।
