NSE कैश मार्केट में खुदरा निवेशकों की शुद्ध खरीदारी मई में घटकर ₹3,011 करोड़ रह गई, जो अप्रैल में ₹20,717 करोड़ थी। बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच, एक्टिव निवेशकों की संख्या लगातार पांचवें महीने गिरी है, जो सावधानी का संकेत है।
क्या हुआ?
अप्रैल के मुकाबले मई में भारतीय खुदरा निवेशकों (Retail Investors) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के कैश मार्केट में काफी सावधानी बरती। मई में उन्होंने नेट ₹3,011 करोड़ का निवेश किया, जो अप्रैल में दर्ज ₹20,717 करोड़ की तुलना में काफी कम है। हालांकि, लगातार तीसरे महीने खुदरा निवेशक नेट खरीदार बने रहे और उन्होंने बाजार को कुछ सहारा दिया, जबकि विदेशी निवेशकों (Offshore Investors) ने बिकवाली की।
निवेशक क्यों बरत रहे हैं सावधानी?
इस बदलाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता (Volatility) नजर आ रही है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो खुदरा निवेशक अक्सर अपनी ट्रेडिंग गतिविधि कम कर देते हैं या नए निवेश धीमा कर देते हैं। हालांकि नेट बाइंग का ट्रेंड बना हुआ है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत की तुलना में बाजार में आने वाले पैसों की मात्रा कम हो गई है।
एक्टिविटी में भी आई कमी
सिर्फ निवेश की कुल राशि ही नहीं घटी, बल्कि बाजार में सक्रिय भागीदारी का स्तर भी गिरा है। मई में कुल कैश मार्केट टर्नओवर में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 32.8% रह गई, जो पिछले महीने 33.8% थी। इससे पता चलता है कि खुदरा ट्रेडर्स पूरे महीने दिन-प्रतिदिन की ट्रेडिंग में कम सक्रिय थे।
इसके अलावा, बाजार में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले यूनिक निवेशकों (Unique Investors) की संख्या लगातार पांच महीनों से घट रही है। मई में 1.08 करोड़ यूनिक निवेशकों ने कम से कम एक बार ट्रेड किया, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 1.13 करोड़ था। इसे ऐसे समझें कि कुल 13.1 करोड़ रजिस्टर्ड निवेशकों में से, मई के अंत तक केवल 1.29 करोड़ निवेशकों ने इक्विटी कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में मिलाकर कम से कम एक बार ट्रेड किया।
प्राइमरी मार्केट का हाल
खुदरा भागीदारी में आई यह सुस्ती प्राइमरी मार्केट में भी देखने को मिली। फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले दो महीनों में IPOs की कम उपलब्धता के कारण एक्टिविटी धीमी रही। इस दौरान नए ऑफर्स में खुदरा निवेश कुल ₹854 करोड़ रहा।
सेकेंडरी मार्केट ट्रेडिंग और प्राइमरी मार्केट सब्सक्रिप्शन को मिलाकर, FY27 के पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) में खुदरा निवेशकों का कुल निवेश ₹24,582 करोड़ रहा। यह आंकड़ा दिखाता है कि अभी भी खुदरा पैसा सिस्टम में आ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार साल की शुरुआत की तुलना में धीमी है।
आगे क्या?
बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशक यह ट्रैक करेंगे कि क्या यह सावधानी जारी रहती है। प्राइमरी मार्केट में एक्टिविटी का स्तर एक महत्वपूर्ण संकेत होगा; IPO लॉन्च में तेजी अक्सर खुदरा भागीदारी को वापस एक्सचेंज की ओर खींचने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, यूनिक एक्टिव निवेशकों की संख्या का ट्रेंड यह बताएगा कि मौजूदा नरमी बाहरी दबावों के कारण एक अस्थायी ठहराव है या खुदरा उत्साह में एक लंबी अवधि की कमी।
