Reliance की तूफानी तेजी, पर Banking और FMCG शेयरों में भारी गिरावट!

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Reliance की तूफानी तेजी, पर Banking और FMCG शेयरों में भारी गिरावट!
Overview

Reliance Industries के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय शेयर बाज़ार ने इस हफ्ते थोड़ी बढ़त दर्ज की है, लेकिन यह बढ़त कई बड़े बैंकिंग और कंज्यूमर गुड्स (FMCG) स्टॉक्स में आई भारी गिरावट को छिपा रही है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ते कच्चे तेल के दाम ने भी बाज़ार की चाल को प्रभावित किया है।

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Reliance के सहारे बाज़ार, पर गहराई में टेंशन!

हाल के दिनों में भारतीय बाज़ार का प्रदर्शन काफी मिला-जुला रहा है। जहां एक ओर Reliance Industries जैसी दिग्गज कंपनियों ने निवेशकों को मालामाल किया है, वहीं दूसरी ओर बैंकिंग और कंज्यूमर स्टेपल्स (FMCG) सेक्टर के बड़े नाम कमजोरी का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति दिखाती है कि बाज़ार अब कुछ चुनिंदा कंपनियों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है।

Reliance ने कैसे खींचा बाज़ार?

पिछले हफ्ते, देश की टॉप 4 कंपनियों के मार्केट वैल्यू (Market Cap) में करीब ₹2.20 लाख करोड़ का इजाफा हुआ। इसमें Reliance Industries का योगदान सबसे बड़ा रहा, जिसने अकेले ₹1.40 लाख करोड़ जोड़े। इसकी कुल वैल्यूएशन अब ₹19.36 लाख करोड़ के करीब पहुंच गई है। Bharti Airtel, Tata Consultancy Services (TCS) और Bajaj Finance ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।

Banking और FMCG सेक्टर में क्यों आई गिरावट?

मगर, यह तेजी सबके लिए नहीं थी। HDFC Bank, State Bank of India (SBI) और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकों का मार्केट कैप मिलकर करीब ₹1.24 लाख करोड़ घट गया। ICICI Bank का मार्केट कैप लगभग ₹45,365 करोड़ और SBI का ₹30,923 करोड़ कम हुआ।

SBI फिलहाल अपने P/E Ratio 12.2 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि ICICI Bank का P/E Ratio 16.7 है, जो कि अपनी बुक वैल्यू के करीब 2.5 गुना पर है। इन बैंकों के शेयरों में गिरावट की वजह रेगुलेटरी चिंताएं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बताई जा रही है।

कंज्यूमर गुड्स सेक्टर की बात करें तो Hindustan Unilever (HUL) का मार्केट कैप करीब ₹18,421 करोड़ गिर गया। HUL का P/E Ratio करीब 34.3 है, जो काफी ज्यादा है। पिछले साल की तुलना में इसके प्रदर्शन में 3.89% की गिरावट आई है, जबकि पिछले 5 सालों में सेल्स ग्रोथ सिर्फ 6.51% रही है। यह दर्शाता है कि कंज्यूमर डिमांड में नरमी आ रही है या स्टॉक ओवरवैल्यूड है।

दूसरे सेक्टर्स का हाल?

  • टेलीकॉम: Bharti Airtel ने ₹43,503 करोड़ जोड़े और इसकी वैल्यूएशन ₹11.49 लाख करोड़ पर पहुंच गई।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: Larsen & Toubro (L&T) के मार्केट कैप में हल्की ₹179 करोड़ की गिरावट आई, यह ₹5.52 लाख करोड़ पर रहा। इसका P/E Ratio करीब 34.04 है।
  • फाइनेंशियल सर्विसेज: Bajaj Finance की वैल्यूएशन करीब ₹5.83 लाख करोड़ बनी रही।
  • इंश्योरेंस: LIC का मार्केट कैप करीब ₹8,222 करोड़ गिर गया। इसका P/E Ratio काफी कम, करीब 9.95 है।

बाज़ार के लिए बड़े खतरे

बाज़ार की यह हालत कुछ बड़े खतरे की ओर इशारा करती है। Reliance Industries पर अत्यधिक निर्भरता 'कंसंट्रेशन रिस्क' (Concentration Risk) पैदा करती है, यानी अगर Reliance में कोई दिक्कत आई तो पूरा बाज़ार हिल सकता है। बैंकिंग शेयरों पर FII की बिकवाली और रेगुलेटरी अनिश्चितता चिंता बढ़ा रही है। HUL जैसी कंपनियों का महंगा वैल्यूएशन और गिरता प्रदर्शन भी एक संकेत है।

इसके अलावा, कच्चे तेल के बढ़ते दाम महंगाई बढ़ा सकते हैं और इकोनॉमिक अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं, जिसका सीधा असर कंज्यूमर खर्च पर पड़ेगा। विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना यह दिखाता है कि वे भारतीय बाज़ार के बड़े हिस्से में भरोसा नहीं कर रहे हैं।

एनालिस्ट की राय

एनालिस्ट्स ICICI Bank को लेकर काफी पॉजिटिव हैं और ज्यादातर 'Buy' की सलाह दे रहे हैं। Bharti Airtel को भी अच्छी रेटिंग मिल रही है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि मिडिल ईस्ट के तनाव (Middle East tensions) भारत की ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं। Reliance Industries की रेटिंग पर नई अपडेट्स आ रही हैं, लेकिन भविष्य के टारगेट पर बारीकी से नज़र रखनी होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.