अनिश्चितता का अभूतपूर्व स्तर
वर्ल्ड अनिश्चितता इंडेक्स (WUI) फरवरी 2026 में 106,862 के ऐसे स्तर पर है, जो पिछले 30 सालों से भी ज़्यादा के रिकॉर्ड को तोड़ता है। यह स्तर कोरोना महामारी, 2008 के वित्तीय संकट या 9/11 के हमलों जैसे दौर से भी कहीं ज़्यादा है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका की आर्थिक और व्यापार नीतियों में दिख रही तेज़ी और बार-बार हो रहे बदलाव हैं।
हाल ही में, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी, 2026 को एक फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। हालांकि, इसके तुरंत बाद अमेरिकी प्रशासन ने 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' की धारा 122 के तहत नए टैरिफ लागू कर दिए। इस तरह की लगातार नीतिगत उठापटक ने ग्लोबल कारोबार के माहौल को बेहद अनिश्चित बना दिया है।
अनिश्चितता के बीच बाज़ार की शान्ति?
इतने बड़े संकट के बावजूद, शेयर बाज़ार (Equity Markets) हैरानी से काफी मजबूत बने हुए हैं। ऐसा लगता है जैसे निवेशक सेंट्र्ल बैंक की मदद, कंपनियों के दमदार नतीजों (Corporate Earnings) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लंबी अवधि की संभावनाओं पर भरोसा कर रहे हैं। 2026 की शुरुआत में इक्विटीज़ ने अच्छा प्रदर्शन किया है, और उम्मीद है कि अमेरिकी शेयर ग्लोबल बाज़ार में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
लेकिन यह मजबूती शायद उतनी टिकाऊ न हो। रिपोर्टों के मुताबिक, AI में निवेश तो बढ़ रहा है, लेकिन कुछ सॉफ्टवेयर कंपनियां मुश्किलों का सामना कर रही हैं। AI पर होने वाले खर्च की स्थिरता पर भी निवेशक सवाल उठा रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिकी बाज़ार का प्रदर्शन अब Nvidia जैसी कंपनियों की कमाई रिपोर्टों पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है, जो AI इकोनॉमी के लिए एक संकेतक बन गए हैं।
सेक्टर पर असर और विकास की चिंताएं
इस अनिश्चितता का सीधा असर उन सेक्टरों पर पड़ रहा है जो व्यापार पर बहुत ज़्यादा निर्भर करते हैं। टैरिफ की उठापटक की वजह से अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स को लागत बढ़ने और निर्यात में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन वैकल्पिक टैरिफ लागू होने से कंपनियों के लिए अनिश्चितता और लागत बनी हुई है।
2026 और 2027 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 2.7% के आसपास लगाया जा रहा है, जो कि सामान्य से कम है। इसकी वजह निवेश में कमी, लगातार बनी हुई अनिश्चितता और कई देशों में कमज़ोर वित्तीय स्थिति है। यह अनिश्चितता किसी एक घटना की वजह से नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर एक साथ चल रही है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।
आगे का रास्ता
2026 का आर्थिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि बाज़ार की मजबूती और बढ़ती अनिश्चितता के बीच संतुलन कैसे बनता है। अगर नीतियों में स्पष्टता आती है, तो आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आ सकती है और बाज़ार तेज़ी से ऊपर जा सकता है। लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए, यह एक लंबी समायोजन (Adjustment) की अवधि हो सकती है। कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य की हर स्थिति के लिए तैयार रहें और अपनी नकदी (Liquidity) को सुरक्षित रखें। नीति निर्माताओं के लिए यह ज़रूरी है कि वे पारदर्शिता और पूर्वानुमान (Predictability) पर ध्यान दें।