FPI की ताबड़तोड़ बिकवाली से बाज़ार पर दबाव
आज भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। BSE Sensex 700 अंकों से ज़्यादा लुढ़क गया, वहीं NSE Nifty50 में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। भले ही पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को वजह बताया जा रहा था, लेकिन असल खेल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड तोड़ बिकवाली का है, जो मार्केट की इस कमजोरी की असली वजह बन गई है।
मार्च में ₹1.22 लाख करोड़ की बिकवाली
आंकड़े बताते हैं कि मार्च के महीने में FPIs ने भारतीय शेयर्स (इक्विटीज़) में रिकॉर्ड ₹122,182 करोड़ की बिकवाली की है। यह बिकवाली का सिलसिला अप्रैल में भी जारी है। इस भारी पूंजी निकासी का सबसे बड़ा असर फाइनेंशियल सेक्टर पर पड़ रहा है, जो FPIs के निवेश का एक बड़ा हिस्सा है।
रुपया और अमेरिकी यील्ड्स बने मुख्य कारण
इस भारी बिकवाली के पीछे कई मैक्रो इकोनॉमिक कारण हैं। गिरता हुआ रुपया, जो फिलहाल 83.50 के आसपास है, और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स, जो लगभग 4.40% पर हैं, विदेशी निवेशकों को उभरते बाज़ारों जैसे भारत से अपना पैसा निकालने पर मजबूर कर रहे हैं। यह स्थिति भारतीय बाज़ार के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशंस पर ज्यादा निर्भर बनाता है।
IT को राहत, बैंकिंग सेक्टर पर भारी मार
एक दिलचस्प बात यह है कि IT सेक्टर, जहाँ HCL Technologies (P/E 28x), TCS (P/E 30x), और Infosys (P/E 27x) जैसी कंपनियों का वैल्यूएशन कुछ हद तक बेहतर हुआ है, वहीं बैंकिंग सेक्टर इस बिकवाली का सबसे ज़्यादा शिकार हो रहा है। State Bank of India (P/E 15x), Axis Bank (P/E 14x), और ICICI Bank (P/E 18x) जैसे बड़े बैंक भी FPIs की बिकवाली से प्रभावित हो रहे हैं। यह तब हो रहा है जब ये बैंक ग्लोबल स्तर पर बेहतर फंडामेंटल्स दिखा रहे हैं।
निवेशकों के लिए मौका?
हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति एक बड़ा मौका लेकर आई है। क्वालिटी भारतीय शेयर, खासकर टॉप फाइनेंशियल स्टॉक्स, आज आकर्षक कीमतों पर मिल रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी FPIs की भारी बिकवाली से बाज़ार में बड़ी गिरावट आती है, तो बिकवाली थमने के बाद बाज़ार तेजी से संभलता भी है। ऐसे में, अगर आप धैर्य रख सकते हैं, तो यह सही समय हो सकता है।