FPI की रिकॉर्ड निकासी! मार्च में **$12.6 अरब** का झटका, फाइनेंशियल सेक्टर पर गिरी गाज, पर कैपिटल गुड्स में दिखी चमक!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FPI की रिकॉर्ड निकासी! मार्च में **$12.6 अरब** का झटका, फाइनेंशियल सेक्टर पर गिरी गाज, पर कैपिटल गुड्स में दिखी चमक!
Overview

भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती क्रूड ऑयल कीमतों के चलते, मार्च महीने में भारतीय शेयर बाज़ार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने रिकॉर्ड **$12.6 अरब** की निकासी की। इस बिकवाली का सबसे बड़ा असर फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर पड़ा।

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भू-राजनीतिक तनाव से थर्राया बाज़ार, FPIs ने की रिकॉर्ड बिकवाली

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने मार्च महीने में भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड $12.6 अरब की बिकवाली की। इस बिकवाली की मार सबसे ज़्यादा फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर पड़ी, जहां से $6.5 अरब का भारी आउटफ्लो हुआ। यह सब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण हुआ, जिसने क्रूड ऑयल की कीमतों को $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया।

ऊंची एनर्जी कीमतों ने भारत के इम्पोर्ट बिल, महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव और बढ़ गया। रुपया ₹93.5-94.60 प्रति डॉलर तक गिर गया, जिसने डॉलर-टर्म वाले रिटर्न को कम कर दिया और FPIs की बिकवाली को और हवा दी।

कैपिटल गुड्स सेक्टर ने दिखाई दमदारी, ब्रॉडर मार्केट में आई गिरावट

FPIs की इस ज़बरदस्त बिकवाली के चलते घरेलू बाज़ार में भारी गिरावट आई। मार्च में Nifty और Sensex दोनों 11% तक गिर गए, जो कि पिछले छह सालों में किसी महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। साल-दर-साल (YTD) देखें तो ये इंडेक्स 15% से ज़्यादा लुढ़क चुके हैं। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स ($1.3 अरब), कंस्ट्रक्शन ($975 मिलियन), टेलीकम्युनिकेशंस ($602 मिलियन), और FMCG ($579 मिलियन) जैसे अन्य सेक्टरों से भी बड़ा आउटफ्लो देखा गया।

इसके ठीक विपरीत, कैपिटल गुड्स सेक्टर ने $343 मिलियन का नेट इनफ्लो आकर्षित किया। यह सेक्टर काफी मज़बूती दिखा रहा है, BSE कैपिटल गुड्स इंडेक्स साल-दर-साल (YTD) 5.2% तक चढ़ा है, जो कि ब्रॉडर मार्केट से काफी बेहतर प्रदर्शन है। हालांकि यह सेक्टर 50.3x के प्रीमियम P/E पर ट्रेड कर रहा है, लेकिन मजबूत ऑर्डर इनफ्लो और सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) की पहलों से इसके वैल्यूएशन को सहारा मिल रहा है।

सेक्टरों में दिखा बड़ा अंतर

फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर, जिसमें बैंक, इंश्योरेंस और हाउसिंग फाइनेंस शामिल हैं, आम तौर पर 15.1x-16.0x के P/E रेश्यो पर ट्रेड करता है। फिलहाल हो रही बिकवाली से पता चलता है कि विदेशी निवेशक इस सेगमेंट में ज़्यादा जोखिम महसूस कर रहे हैं। भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी और कैपिटलाइज़ेशन भले ही अच्छे रिपोर्ट किए गए हों, लेकिन यह सेक्टर इंटरेस्ट रेट साइकल्स और आर्थिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है, जिससे यह विदेशी बिकवाली के लिए ज़्यादा नज़र आता है। सिर्फ Nifty बैंक इंडेक्स ही मार्च में 17% से ज़्यादा लुढ़क गया, जो इस दबाव को दिखाता है।

वहीं, कैपिटल गुड्स सेक्टर का प्रदर्शन सरकारी खर्च से चलने वाले मल्टी-ईयर कैपिटल स्पेंडिंग साइकिल से मज़बूती पा रहा है। इसमें ₹12.2 लाख करोड़ का FY2026-27 का आउटले शामिल है। डिफेंस, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑर्डर बुक बढ़ रही है, जो भविष्य की कमाई के लिए अच्छी विज़िबिलिटी दे रही है।

बाहरी झटके ही FPI आउटफ्लो की वजह

लगातार जारी FPI आउटफ्लो बाज़ार की बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करते हैं। भू-राजनीतिक घटनाएं ही वो मुख्य वजह हैं जिनकी वजह से कैपिटल भारत से निकल रहा है, और ये सीधे कमोडिटी की कीमतों और करेंसी की स्थिरता को प्रभावित कर रही हैं। देश का इंपोर्टेड क्रूड ऑयल पर निर्भर होना इसे सप्लाई में रुकावटों के प्रति और ज़्यादा संवेदनशील बनाता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और करंट अकाउंट डेफिसिट चौड़ा हो सकता है। इसके चलते रुपया कमज़ोर होता है और विदेशी निवेश हतोत्साहित होता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां भले ही भारतीय बैंकों की सुधरती एसेट क्वालिटी का ज़िक्र कर रही हों, लेकिन FPI की बिकवाली की भारी मात्रा और लिक्विडिटी पर इसके असर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

SEBI का सकारात्मक रवैया और बाज़ार का आउटलुक

इस उथल-पुथल के बावजूद, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अधिकारियों ने एक सकारात्मक आउटलुक साझा किया है। SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्रा वर्ष्णेय ने कहा कि मौजूदा बाज़ार में आई गिरावट विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए निवेश का एक बड़ा मौका पेश करती है, और भारतीय कैपिटल मार्केट्स को आकर्षक बताया। विश्लेषकों का मानना है कि कैपिटल गुड्स सेक्टर में ग्रोथ जारी रहेगी, जो सरकार के Capex और मज़बूत ऑर्डर बुक से प्रेरित है। जहां फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर FPI आउटफ्लो से अल्पकालिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहीं घरेलू मांग और लगातार सुधारों से सपोर्ट पाकर यह सेक्टर लाभ वृद्धि हासिल कर सकता है। अप्रैल की शुरुआत में बाज़ार की भावना में सुधार के संकेत दिखे हैं, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी और क्रूड ऑयल कीमतों के ठंडा होने की उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताएं पूरी तरह से हल होने तक अस्थिरता बने रहने की उम्मीद है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.