AI से नौकरियों का डर? पूर्व RBI गवर्नर राजन बोले - 'इतना नहीं घबराएं', जानें क्यों

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI से नौकरियों का डर? पूर्व RBI गवर्नर राजन बोले - 'इतना नहीं घबराएं', जानें क्यों
Overview

पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से व्हाइट-कॉलर नौकरियों के जाने का डर शायद उतना बड़ा नहीं है जितना सोचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को अपनाने में आने वाली मुश्किलें और नीतियां इसके असर को धीमा कर सकती हैं, हालांकि उन्होंने बाजार के भविष्य (market futures) को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं।

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AI नौकरियों पर असर: एक संतुलित नज़रिया

रघुराम राजन ने आगाह किया है कि आने वाले सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण बड़ी संख्या में व्हाइट-कॉलर नौकरियों के खत्म होने का डर शायद बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। उनका तर्क है कि AI का प्रभाव टेक्नोलॉजी को अपनाने की गति, प्रतिस्पर्धा (competition) और सार्वजनिक नीतियों (public policy) जैसे कई कारक तय करेंगे। राजन ने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि नई तकनीकों को पूरी तरह से स्वीकार होने में अक्सर सालों लग जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे टेलीफोन एक्सचेंज को पूरी तरह से लोगों की जगह लेने में दशकों लगे थे।

AI के आर्थिक प्रभाव के दो रास्ते

राजन के मुताबिक, AI के इंटीग्रेशन के दो मुख्य परिदृश्य (scenarios) हो सकते हैं। पहले रास्ते में, कुछ चुनिंदा शक्तिशाली AI प्लेटफॉर्म मार्केट पर हावी हो सकते हैं। इससे AI की कीमतें बढ़ सकती हैं, कंपनियों का मुनाफा (profit) काफी बढ़ सकता है और व्हाइट-कॉलर नौकरियों में बड़ी कटौती हो सकती है। इसके बाद, बचे हुए कर्मचारी सर्विस सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कम वेतन पर काम करने को मजबूर हो सकते हैं।

इसके विपरीत, अगर कई AI प्रोवाइडर समान क्षमताएं पेश करते हुए एक प्रतिस्पर्धी बाजार बनता है, तो AI की कीमतें गिर सकती हैं। इस स्थिति में, उत्पादकता (productivity) में वृद्धि का फायदा अर्थव्यवस्था में ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है, जिससे कम उपभोक्ता लागत और मजबूत मांग के ज़रिए नौकरियों के नुकसान की भरपाई हो सकती है।

कंप्यूटिंग पावर की लागत बनी रोड़ा

व्हार्टन (Wharton) के प्रोफेसर एथन मोलिक (Ethan Mollick) ने AI के तेजी से ऑटोमेशन पर एक व्यावहारिक बाधा का जिक्र किया है – एडवांस AI सिस्टम के लिए ज़रूरी महंगी कंप्यूटिंग पावर (computing power)। यह खर्च कंपनियों को व्यापक वर्कफोर्स रिप्लेसमेंट के बजाय सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे हाई-वैल्यू टास्क के लिए AI को प्राथमिकता देने पर मजबूर कर सकता है। मोलिक का सुझाव है कि अपर्याप्त कंप्यूट क्षमता आने वाले कई सालों तक बड़े पैमाने पर जॉब ऑटोमेशन को सीमित रखेगी, भले ही AI की क्षमताएं कितनी भी बढ़ जाएं।

AI सेक्टर में आसमान छूती वैल्यूएशन

AI सेक्टर में फिलहाल भारी निवेश और जबरदस्त वैल्यूएशन (valuations) देखने को मिल रही है। OpenAI और Anthropic जैसे प्रमुख AI स्टार्ट­अप्स ने भारी-भरकम फंडिंग जुटाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, OpenAI का वैल्यूएशन $730 अरब से $840 अरब के बीच आंका जा रहा है, जबकि Anthropic का वैल्यूएशन $380 अरब है। पब्लिकली ट्रेडेड टेक दिग्गजों में Microsoft का मार्केट कैप करीब $2.94 ट्रिलियन, Alphabet (Google) का लगभग $3.66 ट्रिलियन और Meta Platforms का $1.55 ट्रिलियन है। यह भविष्य की ग्रोथ में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है, लेकिन परिचालन (operational) लागतों को देखते हुए इन वैल्यूएशन की स्थिरता पर सवाल खड़े होते हैं।

ग्लोबल AI रेगुलेशन: एक मिलाजुला माहौल

AI के लिए वैश्विक नियामक परिदृश्य (global regulatory landscape) तेजी से बदल रहा है और काफी खंडित (fragmented) है, जिससे एक जटिल माहौल बन रहा है। 2026 तक, विभिन्न क्षेत्र अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाएंगे, जैसे कि अमेरिकी डीरेग्यूलेशन प्रयास, EU का AI एक्ट और चीन का कंटेंट कंट्रोल पर फोकस। इन विविध ढांचों में पारदर्शिता, जोखिम प्रबंधन और जवाबदेही की आवश्यकता होगी, जिससे कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अनुपालन बाधाएं (compliance hurdles) पैदा होंगी और सीमा पार काम करने वाले व्यवसायों के लिए बाजार में प्रवेश (market entry) में रुकावटें आ सकती हैं।

जॉब मार्केट का भविष्य: बदलाव या खात्मा?

हालांकि राजन धीमी अपनाने की गति पर जोर देते हैं, अन्य विश्लेषण एक जटिल जॉब मार्केट तस्वीर पेश करते हैं। गार्टनर (Gartner) का अनुमान है कि AI हर साल 3.2 करोड़ नौकरियों को बदल देगा, लेकिन 2028 या 2029 से यह जितनी नौकरियां खत्म करेगा, उससे ज़्यादा पैदा कर सकता है। इसके विपरीत, IMF और Anthropic के CEO के अनुमानों में महत्वपूर्ण नौकरी के नुकसान की चेतावनी दी गई है, जिसमें अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में 50% तक एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियां गायब हो सकती हैं। एक कोग्निजेंट (Cognizant) रिपोर्ट बताती है कि 93% अमेरिकी नौकरियों में ऐसे कार्य हैं जिन्हें AI स्वचालित कर सकता है, जो $4.5 ट्रिलियन के संभावित श्रम लागत बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, हालांकि इसका मतलब सीधे तौर पर नौकरी का प्रतिस्थापन (job replacement) नहीं है। कई विश्लेषकों का मानना ​​है कि AI उत्पादकता लाभ के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी (layoffs) अभी प्रमुख चलन नहीं है, लेकिन नौकरियों की भूमिकाएं बदल रही हैं, जिससे कर्मचारियों को अनुकूलित (adapt) और पुन: कौशल (reskill) प्राप्त करने की आवश्यकता है।

जोखिम: वैल्यूएशन, लागतें और रेगुलेशन

AI के प्रति उत्साह के बावजूद, कई महत्वपूर्ण जोखिम इसके भविष्य पर छाए हुए हैं। AI स्टार्ट­अप्स की अत्यधिक उच्च वैल्यूएशन और उनकी तेज खर्च दर एक 'AI बबल' और उनके बिजनेस मॉडल की दीर्घकालिक व्यवहार्यता (viability) के बारे में चिंता पैदा करती है। कंप्यूटिंग पावर की उच्च लागत एक बाधा बनी हुई है, जो कई नौकरी कार्यों में तत्काल, व्यापक ऑटोमेशन के दायरे को सीमित करती है। इसके अलावा, विविध वैश्विक नियम अनुपालन चुनौतियां और अनिश्चितता पैदा करते हैं, जो AI परिनियोजन (deployment) को धीमा कर सकते हैं और लागत बढ़ा सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से, तेजी से तकनीकी अपनाने में अक्सर देरी, नीति और आर्थिक कारकों से बाधा आई है, जिससे पता चलता है कि AI का गहरा प्रभाव कुछ भविष्यवाणियों की तुलना में अधिक धीरे-धीरे सामने आ सकता है। भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा (geopolitical competition) आपूर्ति श्रृंखलाओं और बुनियादी ढांचे को भी जटिल बनाती है।

रणनीति: AI के बदलते परिदृश्य में नेविगेट करना

जैसे-जैसे AI का एकीकरण जारी है, व्यवसायों को इन भिन्न परिदृश्यों में नेविगेट करना होगा। बाजार अटकलों (speculation) से बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की ओर बढ़ रहा है, जिसमें खरबों का निवेश हो रहा है। जो कंपनियां विविध प्रतिस्पर्धी AI परिदृश्यों के अनुकूल हो सकती हैं, जटिल नियामक वातावरण का प्रबंधन कर सकती हैं, और AI की राजस्व क्षमता को साबित करने पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं, वे सबसे अच्छी स्थिति में होंगी। वर्तमान माहौल में फुर्तीली योजना (agile planning) और अनुकूलन की आवश्यकता है, क्योंकि AI का मार्ग अभी भी विकसित हो रहा है।

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